संपादकीय : स्मार्ट मीटर की स्मार्ट चाल

 

उत्तर प्रदेश के मध्यांचल बिजली निगम ने तय किया है कि स्मार्ट मीटर वाले उपभोक्ता का कनेक्शन, बकाया ज्यादा होने के कारण अगर काटना पड़ता है तो कनेक्शन ऑनलाइन ही काटा जाएगा। अभियंता की जिम्मदारी है कि वह कंट्रोल रूम को सूचित कर कनेक्शन कटवाए।  पोल पर चढ़ कर कनेक्शन काटने की शिकायत किसी अभियंता-कर्मचारी के बारे में यदि आई तो विभाग सख्त कार्रवाई करेगा। उपभोक्ता बिजली के बकाया जमा कर देने पर तत्काल कनेक्शन जोड़ दिया जाए।

Smart Meter

निगम को शिकायतें मिलीं थीं कि बकाया ज्यादा होने पर स्थानीय बिलली कर्मचारी पोल से कनेक्शन काटते हैं। ऐसे डीफॉल्टर उपभोक्ता कर्मचारियों से मिलीभगत कर कुछ देर बाद ही निजी कर्मियों से कनेक्शन जुड़वा लेते हैं। बिजली का उपयोग बदस्तूर जारी रहता है। विभाग को लंबा नुक्सान होता है, कोई अभियंता काटे गए कनेक्शन की ओर देखने भी नहीं जाता कि वहां क्या हो रहा है। यानी कि मध्यांचल बिजली निगम के कर्ताधर्ता यह जानते हैं कि उनके मातहत कैसा काम करते हैं। स्मार्ट मीटरों के उपभोक्ताओं का कहना है कि री-कनेक्शन और डी-कनेक्शन के नाम पर चार्ज लिया जा रहा है, यह कतई स्वीकार्य नहीं। बहारहाल स्मार्ट मीटर लगाये जाने पर रोक लगी है।

बिजली विभाग की भी कथा निराली है। लाइन लॉस हो या बिजली चोरी, खामियाजा बिजली के उस उपभोक्ता को भुगतना पड़ता है जो ईमानदारी से बिल जमा करता है। कभी बिजली उत्पादन को लेकर बिजली घरों का प्लांट लोड फैक्टर बहुत बड़ी समस्या थी। बाद में उत्पादन और वितरण को अलग-अलग कर दिया गया।

दशक बीत गए, बिजली विभाग लाइन लॉस का आकड़ा कम नहीं कर पाया। कई बार तो यह चालीस प्रतिशत तक पहुंच जाता है। एक बार यह भी प्रयोग किया गया कि फीडर के पास मीटर लगाए गए। इसके बाद कनेक्शन वाले पोल पर भी मीटर लगाने का भी प्रयोग हुआ। इन मीटरों को लगाने का मकसद यही था कि जितनी बिजली फीडर से खर्च हो रही है, उतने की मीटर रीडिंग उस इलाके के उपभोक्ताओं की मीटर रीडिंग जोड़ कर आना चाहिए। ताकि पता चल सके कि सब ठीक चल रहा है या कहीं चोरी हो रही है। इसके बाद चायनीज मीटरों का दौर भी आया। उसमें विभागीय मिलभगत से मीटर जाम किए जाने के मामले सामने आने लगे।

यहां तक कि मीटर को रोकने और चलाने के लिए रिमोट बन गए। फिर स्मार्ट मीटर और प्रि-पेड मीटरों का दौर आया। प्रि-पेड मीटर ज्यादा लोकप्रिय नहीं हुए। स्मार्ट मीटर लगाये तो गए, हाल में शक्तिभवन स्थित कंट्रोल रूम से ही गलत कमांड देकर लाखों कनेक्शन काट दिए गए। स्थिति सामान्य होने में एक सप्ताह का समय लगा। अब मध्यांचल बिजली निगम के इस नए फरमान से बिजली उपभोक्ताओं का क्या भला होगा। क्या सुविधा मिलेगी, यह समय ही बताएगा। बिजली विभाग की टीम बड़ी है, बड़े-बड़े विशेषज्ञ हैं।

राज्य सरकार का उपक्रम है, राज्य पुलिस की सुविधा मिल जाती है। ऐसे में ज्यादा बकाया होना ही नहीं चाहिए। बकाया अधिक होने के पहले ही उपभोक्ता को दो-एक बार चेतावनी दी जाए तो काफी कुछ रुपया खजाने में जमा हो सकता है। यह भी हो सकता है कि अधिसंख्य मामलों में कनेक्शन काटने की नौबत ही न आए। बहरहाल यह प्रयोग क्या परिणाम सामने लेकर आता यह वक्त ही बताएगा।

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