वन टू वन- दूसरे राज्यों के मुकाबले यूपी की कानून व्यवस्था बेहतर

यूपी काडर के वर्ष-1987 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अवनीश अवस्थी की गिनती यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विश्वसनीय अफसरों में होती है। यही वजह है कि वे गृह विभाग जैसे सूबे की कानून व्यवस्था से जुड़े अति महत्वपूर्ण विभाग के मुखिया के साथ-साथ मुख्यमंत्री के कई ड्रीम प्रोजेक्ट भी यूपीडा के सीईओ के नाते संभाल रहे हैं। लोकभवन स्थित अपने कार्यालय में बातचीत करते हुए श्री अवस्थी ने देश के दूसरे राज्यों के मुकाबले यूपी की कानून व्यवस्था को बेहतर बताया। साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर की जा रही माफिया और गुंडों के खिलाफ कार्रवाई की जानकारी दी।

उन्होंने योगी जी के ड्रीम प्रोजेक्ट मिशन शक्तिअभियान से लेकर सेफ सिटी योजना को लेकर विस्तृत बातचीत की। उन्होंने कहा कि पुलिस ने लाकडाउन में अच्छा काम किया है। इस दौरान उसका मानवीय चेहरा भी लोगों के सामने आया। सरकार की भी कोशिश है कि पुलिस का यह मानवीय चेहरा जनता के बीच बना रहे। पेश है विश्ववार्ता मीडिया ग्रुप के उत्तर प्रदेश के राज्य ब्यूरो प्रमुख गोलेश स्वामी से अपर मुख्य सचिव गृह श्री अवस्थी से हुई विस्तृत बातचीत के प्रमुख अंश-

देश के दूसरे राज्यों के मुकाबले उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था को आप कहां पाते हैं?
देश के दूसरों राज्यों के मुकाबले यूपी की कानून व्यवस्था कई मायनों में बेहतर है। यूपी देश में सबसे ज्यादा आबादी वाला प्रदेश है। इसके बावजूद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की हनक से यहां की कानून व्यवस्था में पिछली सरकारों के मुकाबले काफी सुधार आया है। इस समय थानों में एफआईआर दर्ज होती है। आम लोगों की सुनवाई होती है। आंकड़े स्पष्ट बोलते हैं कि उत्तर प्रदेश में योगी जी की सरकार में हत्या, बलात्कार, लूट, डकैती और अपहरण जैसे जघन्य अपराधों में काफी कमी आई है।

प्रदेश सरकार द्वारा माफियाओं-गुंडों के खिलाफ चल रहे अभियान का क्या परिणाम सामने आया है?
यूपी सरकार ने ऐसे माफियाओं और गुंडों के खिलाफ अभियान शुरू किया है जो सरकारी व आम लोगों की जमीनों पर कब्जा कर महल खड़े कर लेते थे और जनता में दहशत का पर्याय बने हुए थे। सरकार ने अभी तक ऐसे माफियाओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करके 500 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की है। बड़ी संख्या में गुंडों के खिलाफ गैंगेस्टर एक्ट लगाया गया है। अनेक को जिला बदर किया गया है। इससे आम जनता ने राहत की सांस ली है। यह कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
लखनऊ और नोएडा में पुलिस कमिश्नर सिस्टम इस सरकार ने लागू करने का साहस किया है। इस प्रयोग को कितना सफल मानते हैं और क्या आगे अन्य बड़े शहरों में भी इसे लागू करने की योजना है?
लखनऊ और नोएडा का पुलिस कमिश्नर सिस्टम के प्रयोग को सरकार सफल मानती है। जहां तक इस सिस्टम को अन्य बड़े शहरों में लागू करने का सवाल है, इस बारे में अभी कुछ कहा नहीं जा सकता है। यह विचाराधीन है। फिलहाल तो दोनों शहरों पर ही फोकस है।

महिला और बालिकाओं के प्रति होने वाले अपराधों को रोकने के लिए इधर सरकार ने क्या किया है और आगे क्या योजना है?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर महिला और बालिकाओं की सुरक्षा के लिए यूपी में मिशन शक्तिअभियान चलाया जा रहा है। पहले यह अभियान केवल एक सप्ताह ही चलना था यानी 17 अक्टूबर से लेकर 25 अक्टूबर तक लेकिन इसकी सफलता के मद्देनजर इसे 180 दिन चलाया जाएगा। इस अभियान के तहत की गई कार्रवाई से पुलिस की छवि में उच्च कोटि का सुधार हुआ है। इस योजना की एक खास बात यह भी है कि गृह विभाग ने इस योजना को सफल बनाने के लिए प्रदेश के 24 विभागों को जोड़ा है। सभी विभाग इस योजना के तहत अलग-अलग तरीकों से काम कर रहे हैं और इसे सफल बनाने के लिए जमीन पर उतार रहे हैं।

इस योजना के तहत विभागों की तरह सूबे की 24 करोड़ जनता को भी जोडऩे का प्रयास है। इस योजना का लाभ सूबे के सभी 75 जिलों के सभी निकायों, ब्लाकों और ग्राम पंचायतों में पहुंचाया जाना है। विधानसभा उप चुनावों के मद्देनजर 7 जिले फिलहाल छोड़ दिए गए हैं। चुनाव संपन्न होने के बाद छूटे हुए इन 7 जिलों में भी यह योजना लागू की जाएगी। इस अभियान को सफल बनाने में पुलिस और एंटी रोमियो स्क्वायड भी लगा है। यही नहीं, थानों में महिला हेल्प डेस्क और सीक्रेट रूम भी स्थापित किए जा रहे हैं जिससे महिलाएं बेझिझक थाने जाकर अपनी शिकायत कह सकेंगी। क्योंकि उनकी शिकायत सुनने वाली और हल करने वाली भी महिला ही होगी।

पिंक सेफ सिटी योजना क्या है और इससे क्या लाभ होंगे?
पिंक सेफ सिटी योजना अभी केवल यूपी की राजधानी लखनऊ में शुरू की गई है। इसका नाम भी लखनऊ सेफ सिटी योजना रखा गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने निर्भया फंड से देश के आठ शहरों में इस योजना को शुरू किया है जिसमें यूपी की राजधानी लखनऊ भी शामिल है। यूपी में इस तरह की यह पहली योजना है। जिस पर 194 करोड़ रुपये खर्च होंगे। जिसमें 60 फीसदी केंद्र और 40 फीसदी राज्य सरकार खर्च करेंगी। इसकी खास बात यह है कि इस योजना के तहत पिंक पेट्रोल्स, पिंक एसयूवी, पिंक बूथ, पिंक आउटपोस्ट, पिंक स्कूटर, पिंक मोटरसाइकिल, पिंक टायललेट्स यानी सब कुछ पिंक होगा। यह पिंक महिला और महिलाओं की सुरक्षा का द्योतक है।

पिंक पेट्रोलिंग के लिए वाहन खरीदे जा चुके हैं और राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल द्वारा इनको हरी झंडी भी दिखा कर शहर में भ्रमण के लिए रवाना कर दिया गया है। सौ पिंक बूथ स्थापित होने हैं, जिनमें से 25 चालू हो गए हैं। इनका लोकार्पण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा किया जा चुका है। इस योजना की इम्प्लीमेंट एजेंसी वीपीएल-1090, लखनऊ कमिश्नरेट, यूपी राजकीय निर्माण निगम, यूपी डेस्को और सूचना विभाग हैं। वीमेन पावर लाइन की क्षमता वृद्धि के लिए निर्मित नए भवन का लोकार्पण, डाटा एनालिटिक्स सेंटर, साइबर फोरेंसिक सेल और काल सेंटर की क्षमता वृद्धि के लिए स्थापित 80 नए टर्मिनल का लोकापर्ण भी मुख्यमंत्री द्वारा किया जा चुका है।

अपर मुख्य सचिव गृह श्री अवस्थी


योगी सरकार ने पुलिस सुधार की दिशा में काफी काम किए हैं। पुलिस सुधार के लिए सरकार ने क्या किया है और आगे क्या-क्या करने की योजना है?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गनिर्देशन में पुलिस सुधार के लिए सरकार बहुत काम कर रही है। खासतौर से लखनऊ में पुलिस और फोरेंसिंक यूनिवर्सिटी की स्थापना इस दिशा में यह मील का पत्थर साबित होगी। इस यूनिवर्सिटी में फोरेंसिक और साइबर क्राइम साइंस पर पढ़ाई और रिसर्च का काम हो सकेगा। जिससे पुलिस को एडवांस तकनीकी से अपराध नियंत्रण करने में सफलता प्राप्त हो सकेगी। यूनिवर्सिटी के लिए जमीन आवंटित हो चुकी है। इसके लिए एक्ट और नियम भी बन चुके हैं। पदों के सृजन का काम भी किया जा चुका है। जल्द ही इस यूनिवर्सिटी का काम शुरू हो जाएगा।
नई स्पेशल सिक्योरिटी फोर्स के गठन के पीछे क्या उद्देश्य है और इससे किन संस्थानों को सुरक्षा का लाभ मिलेगा?
यूपी सरकार ने नई स्पेशल सिक्योरिटी फोर्स (विशेष सुरक्षा बल) का गठन किया है। जिसकी पांच बटालियनें होंगी। ये बटालियनें डिस्ट्रिक्ट कोर्ट और मेट्रो आदि संस्थानों की सुरक्षा में तैनात होंगी। जिससे इनकी अभेद्य सुरक्षा हो सकेगी। यदि बैंकों को अपनी सुरक्षा मबूत करने के लिए इन बटालियनों के जवानों की जरूरत होगी तो उन्हें भी सीआईएसएफ की तर्ज पर निर्धारित रेट पर भुगतान के हिसाब से यह सुविधा उनको उपलब्ध कराई जाएगी।

यही नहीं, योगी सरकार ने अपने कार्यकाल में दो हजार करोड़ रुपये की बुनियादी सुविधाओं का मजबूत ढांचा तैयार किया है। जिसमें नए थाना, चौकियां, बैरकें और आवास आदि व्यवस्थाएं प्रमुख हैं। कुल मिलाकर सरकार की कोशिश है कि पुलिस का मानवीय चेहरा बना रहे। अपर मुख्य सचिव गृह जोर देकर कहते हैं कि यूपी की जनता यह नहीं भूल सकती कि लाकडाउन में पुलिस ने काफी अच्छा काम किया। इस दौरान उसका मानवीय चेहरा भी सामने आया। सरकार की कोशिश है कि पुलिस का मानवीय चेहरा बना रहे जिससे आम लोगों में उसके प्रति भरोसा कायम रहे।
पुलिस में भ्रष्टाचार के प्रति सरकार का क्या दृष्टिकोण है?

योगी सरकार ने भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टालरेंस की नीति अपनाई है। वह चाहे पुलिस का भ्रष्टाचार हो या किसी अन्य विभाग का। पिछले दिनों कई जिलों के एसपी सहित बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ सरकार ने कार्रवाई की है। इतने बड़े पैमाने पर शायद पहले ऐसी कार्रवाई नहीं हुई होगी। मुख्यमंत्री जी का साफ संदेश है कि भ्रष्टाचार से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। जो भ्रष्टाचार करेगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा। इससे पुलिस में भ्रष्टाचार काफी कम हुआ है।

अपराधियों के खिलाफ की गई कार्रवाई में यूपी टाॅप पर

एनसीआरबी के ही वर्ष-2018 के आंकड़े बताते हैं कि यूपी पुलिस द्वारा अपराधियों के खिलाफ की गई कार्रवाई में महिला संबंधी अपराधों के खिलाफ की गई कार्रवाई में देश में पहला स्थान, साइबर अपराधों में दोष सिद्ध कार्रवाई में पहला स्थान, शस्त्रों के जब्तीकरण की कार्रवाई में पहला स्थान, जाली मुद्रा पकडऩे के मामले में की गई कार्रवाई में पहला स्थान प्राप्त किया है।

इसी तरह आईपीसी के मामलों में कार्रवाई में दूसरा स्थान, आईपीसी के तहत गिरफ्तार अपराधियों के दोष सिद्ध मामलों में दूसरा स्थान प्राप्त किया है। इसी तरह एसआईआई के तहत गिरफ्तार अपराधों में दोष सिद्ध मामलों में तृतीय स्थान और संपत्ति बरामदगी मामलों में पूरे देश में छठवां स्थान प्राप्त किया है। इससे स्पष्ट होता है कि देश की सबसे बड़ी आबादी वाले प्रदेश की स्थिति अपराधों और अपराधियों के खिलाफ की गई कार्रवाई के मामलों में अन्य राज्यों के मुकाबले काफी बेहतर है।

मिशन शक्ति अभियान के परिणाम उत्साहजनक

अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी ने 17 अक्टूबर से 25 अक्टूबर तक चलाए गए मिशन शक्ति अभियान के तहत पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई का ब्योरा पेश किया। उन्होंने बताया कि एंटी रोमियो स्क्वायड की 1574 टीमें लगाई गईं। इसने 59,277 स्थानों को चेक किया। 2,33,880 व्यक्तियों की चेकिंग की। 36,595 शपथ पत्र भरवाए गए। 107/116 के तहत 9,166 के विरुद्ध कार्रवाई की गई। 4,653 व्यक्तियों के खिलाफ 151 की कार्रवाई की गई। 1524 के खिलाफ गुंडा एक्ट की कार्रवाई की गई। इनके अलावा 23,078 अन्य कार्रवाई की गई। इसीलिए इस मिशन की सफलता को देखकर सरकार ने इसे 180 दिन चलाने का फैसला किया है।

एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार यूपी में अपराध कम

अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश कुमार अवस्थी यूपी में अपराधों में कमी का दावा यूं ही नहीं करते, वे इसके सुबूत के रूप में केंद्र सरकार की अपराध विश्लेषण करने वाली संस्था नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो, नई दिल्ली (एनसीआरबी) के आंकड़े पेश करते हैं। एनसीआरबी द्वारा प्रकाशित क्राइम इन इंडिया-2018 में दिए गए आंकड़ों के अनुसार देश में कुल 31,32,954 आईपीसी के अपराध पंजीकृत हुए जिनमें से 3,42,355 अपराध यूपी में घटित हुए। जो देश में घटित अपराधों का 10.92 फीसदी है। जबकि यूपी की आबादी देश की आबादी का 16.85 फीसदी है। अपराध की स्थिति को समझने के लिए क्राइम रेट एक बेहतर और विश्वसनीय संकेतक है।

एनसीआरबी, नई दिल्ली के आंकड़ों के अनुसार वर्ष-2016, 2017 व 2018 में हत्या, बच्चों, महिलाओं व अनुसूचित जाति व जनजाति के प्रति घटित अपराधों में देश के 28 राज्य एवं नौ केंद्रशासित राज्यों में यूपी का क्राइम रेट देश के औसत क्राइम रेट से कम है। यानी देश का औसत क्राइम रेट हत्या के मामलों में वर्ष-2016 में 2.4 फीसदी, वर्ष-2017 में 2.2 और वर्ष-2018 में 2.2 रहा जबकि इसके मुकाबले यूपी का क्राइम रेट क्रमश: 2.2 फीसदी, 1.9 फीसदी और 1.8 फीसदी रहा है।

यानी योगी सरकार में हत्या के मामलों में कमी आई। यही नहीं, हत्या के मामले पश्चिम बंगाल, राजस्थान आदि राज्यों से भी कम हैं। इसी तरह बच्चों, महिलाओं और एससी-एसटी के प्रति अपराधों में भी यूपी में काफी कमी आई है। इस तरह यूपी का डकैती में देश में 31वां, लूट में 20वां, हत्या में 26वां, बलात्कार में 24वां, पाक्सो एक्ट में 23वां और महिला संबंधी अपराध में 15वां स्थान है।

देश में कुल 31,32,954 आईपीसी के अपराध पंजीकृत हुए जिनमें से 3,42,355 अपराध यूपी में घटित हुए। जो देश में घटित अपराधों का 10.92 फीसदी है। जबकि यूपी की आबादी देश की आबादी का 16.85 फीसदी है। अपराध की स्थिति को समझने के लिए क्राइम रेट एक बेहतर और विश्वसनीय संकेतक है। एनसीआरबी, नई दिल्ली के आंकड़ों के अनुसार वर्ष-2016, 2017 व 2018 में हत्या, बच्चों, महिलाओं व अनुसूचित जाति व जनजाति के प्रति घटित अपराधों में देश के 28 राज्य एवं नौ केंद्रशासित राज्यों में यूपी का क्राइम रेट देश के औसत क्राइम रेट से कम है।
यूपी सरकार ने नई स्पेशल सिक्योरिटी फोर्स (विशेष सुरक्षा बल) का गठन किया है।

जिसकी पांच बटालियनें होंगी। ये बटालियनें डिस्ट्रिक्ट कोर्ट और मेट्रो आदि संस्थानों की सुरक्षा में तैनात होंगी। जिससे इनकी अभेद्य सुरक्षा हो सकेगी। यदि बैंकों को अपनी सुरक्षा मबूत करने के लिए इन बटालियनों के जवानों की जरूरत होगी तो उन्हें भी सीआईएसएफ की तर्ज पर निर्धारित रेट पर भुगतान के हिसाब से यह सुविधा उनको उपलब्ध कराई जाएगी। यही नहीं, योगी सरकार ने अपने कार्यकाल में दो हजार करोड़ रुपये की बुनियादी सुविधाओं का मजबूत ढांचा तैयार किया है।

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