वृंदा करात ने मोदी सरकार पर लगाया बड़ा आरोप, कहा- किसानों और मजदूरों का हो रहा अपमान

रांची। माकपा राज्य कमिटी की दो दिवसीय बैठक सोमवार को मैथन (धनबाद) में संपन्न हो गयी। कोरोना महामारी के बाद राज्य कमिटी की यह पहली फिजिकल बैठक थी। इसमें पार्टी की पोलिट ब्यूरो सदस्य और झारखंड की प्रभारी कामरेड वृंदा करात भी शामिल हुई।

वृंदा करात

बैठक के बाद प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए वृंदा करात ने कहा कि मोदी सरकार भारत में लोकतंत्र को खत्म करने, आत्म निर्भरता के नाम पर देश की अर्थव्यवस्था का भट्टा बैठाने, किसानों और मजदूरों का अपमान करने और हर ज्वलंत मुद्दों पर झूठ का पुलिंदा खोलने में अपने को कथित विश्व गुरु के रुप में प्रोजेक्ट कर रही है। इनके पहले के कथित विश्व गुरु डोनाल्ड ट्रम्प की हार से भी इन्होंने कोई सबक नहीं लिया है।

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उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी को भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने अवसर बताकर संसद में बिना समुचित बहस कराए और बिना वोटिंग के देश के मेहनतकशों के अधिकारों पर बंदिश लगाने और उन्हें कार्पोरेट घरानों का गुलाम बनाने का कानून पारित करा लिया। इतना नहीं छद्म राष्ट्रवाद और देशभक्ति का स्वांग रचने वाली मोदी सरकार देश की अर्थव्यवस्था की रीढ और और संप्रभुता के प्रतीक सार्वजनिक क्षेत्र के उधमो का बड़े पैमाने पर नीजिकरण कर अपने देशी-विदेशी आकाओं के सामने आत्म समर्पण कर दिया है।

उन्होंने आगे कहा कि देश की आजादी के बाद हो रहे इतने व्यापक किसान आंदोलन को मोदी सरकार आतंकवादी, विदेशी और राष्ट्र विरोधी कहकर बदनाम करने मे अपनी पूरी ऊर्जा नष्ट कर रही है। जबकि हमारे देश के अन्नदाता आज 81 दिनों से दिल्ली की सीमा पर डटे हुए हैं और किसानों के आंदोलन का दायरा पूरे देश में तेजी से बढता जा रहा है। जो इस बात का सबूत है कि मोदी सरकार की जन विरोधी नीतियों के किसानों – मजदूरों का असंतोष बढता जा रहा है।यही असंतोष मोदी सरकार के पतन का कारण बनेगा।

बैठक में माकपा राज्य कमिटी के 36 सदस्यों समेत पार्टी के 23 जिला कमिटियों के जिला सचिवों ने भाग लिया। बैठक की अध्यक्षता मो. इकबाल ने की । बैठक में पार्टी के राज्य सचिव गोपीकांत बक्सी की ओर से झारखंड के राजनीतिक घटना विकास और अब तक की गतिविधियों की रिपोर्ट पेश की गई और आगामी आंदोलनात्मक कार्यक्रम के लिए एक कार्य योजना की रुपरेखा चर्चा के लिए राज्य कमिटी में रखा गया। इस पर बैठक में विचार-विमर्श कर कुछ सुझावों के साथ इस कार्य योजना को पारित किया गया। संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर 4 घंटे का रेल रोको कार्यक्रम को समर्थन का एलान किया गया।

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