खरी कसौटी : हम खुश हैं कि हमारी नाक तुमसे कम कटी है

Ashok Pandey

अशोक पाण्डेय

रोम जल रहा था और नीरो वंशी बजा रहा था वैसे तो यह कहावत 1956 साल पुरानी है लेकिन उत्तर प्रदेश में आजकल चरितार्थ हो रही है। हाथरस की बेटी की आबरू की चिता की लपटों की आंच पूरे देश को सुलगा रही है तब सूबे की कानून व्यवस्था के मुखिया एडीजी प्रशांत कुमार गर्व के साथ बता रहे हैं कि उत्तर प्रदेश हत्या, लूट और बलात्कार के मामलों में देश के 36 राज्यों (केंद्र शासित सहित) में 28वें स्थान पर है।

गौरतलब है कि आज से ठीक 6 साल पहले नरेंद्र मोदी ने देश की 130 करोड़ जनता को अच्छे दिनों और रामराज्य का सपना दिखाकर दिल्ली की सल्तनत हासिल की और आज से साढ़े तीन साल पहले योगी आदित्यनाथ को सत्ता सौंपकर श्रीराम के जन्म प्रदेश की जनता इतनी आश्वस्त हो गयी कि कम से कम हमारे यहां तो रामराज्य आ ही जायेगा पर यह सपना ही रह गया। लेकिन हम खुश हैं क्योंकि हमारे पास दूसरों को चिढ़ाने की आंकड़ेबाजी है कि तुम्हारी नाक हमसे ज्यादा कटी है। भगवान राम में एक आम आदमी द्वारा

अपनी पत्नी के चरित्र मात्र शक के कारण मां सीता का परित्याग कर दिया था लेकिन हम हाथरस की पीिड़ता की चिता से सरकार की हथेली जलाने वाले डीएम प्रवीण कुमार को अभी तक बचा रहे हैं। काश राम के आदर्शों पर चलने का दंभ  भरने वाली सरकार की कानून व्यवस्था के प्रमुख यह कहते हैं कि उत्तर प्रदेश में अपराध धीरे-धीरे शून्य की ओर बढ़ रहा है लेकिन वह तो इतने पर ही खुश हैं कि हम कम बलात्कारी हैं।

हाथरस कांड में अफसरों की एरोगेंसी ने ही सरकार की फजीहत करायी। थानेदार से लेकर िजलेदार तक ने संवेदना और शालीनता की मयार्दाओं को तार-तार किया। इलाकाई पुलिस 14 सितंबर को घटना के दिन ही यदि विधिसम्मत कार्रवाई करती तो शायद बखेड़ा खड़ा नहीं होता। पीिड़ता की शिकायत दर्ज होती, उसका मेडिकल कराया जाता, आरोपियों को पकड़ा जाता तो बात आगे ही न बढ़ती।

इस चूक के बाद बड़े अफसर भी नहीं चेते। डीएम प्रवीण कुमार और एसपी विकांतवीर नींद से तब जागे जब पीिड़़ता के शरीर को हिन्दू संस्कृति के उलट चंदन की जगह केरोसिन की आग उनके बंगले तक पहुंची। अच्छा हुआ कि अफसरों की सोई आत्मा ने यह नहीं कहा कि वह गरीब की बेटी थी, उसे चंदन की चिता कहां नसीब होती।

देश की गति तय करने वाले समाज, प्रशासन, कानून और राजनीति के सभी पुरोहितों का एक जैसा मन है कि अफसरों ने पूरे मामले में हठधर्मिता दिखाई जिस कारण हालात बेकाबू हुए। हरियाणा के पूर्व आईजी रणवीर सिंह ने कहा है कि ल़ एंड आर्डर कितना भी खराब होता पुलिस की राय में परिवार की गैरमौजूदगी में अंतिम संस्कार नहीं करना चाहिये। यूपी के पूर्व डीजीपी एके जैन का साफ कहना है कि पूरे केस में डीएम की भूमिका संदिग्ध है। इतने संवेदनशील मुद्दे पर डीएम को शालीनता का व्यवहार करना चाहिये न कि धमकी का।

दिल्ली के पूर्व पुलिस कमिश्नर टीआर कक्कड़ का मानना है कि किसी की भी इतनी हैसियत नहीं कि डीएम के आदेश के बगैर आधी रात को गैरकानूनी तरीके से शव जला दे। लावारिस शवों के संस्कार के लिए भी पुलिस कम से कम 72 घंटे का इंतजार करती है। कानून के जानकार भी पुलिस प्रशासन को दोषी ठहरा रहे हैं। इस राजनीति को शतरंज की बिसात मान भी लें तो राहुल, प्रियंका, अखिलेश मायावती के आरोपों को नकार सकते हैं। लेकिन लखनऊ से दिल्ली तक सत्ता और पार्टी में शामिल नेताओं की भावनाओं को नकार नहीं सकते। केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति, रामदास अठावले और उमा भारती जो सवाल उठा रही हैं उनके जवाब को यह भरोसा दिलाना होगा कि सूबे में कानून का राज रहेगा।

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