पश्चिम बंगाल चुनाव हिंसा मामला: सुप्रीम कोर्ट ने ममता सरकार से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल सरकार से राज्य विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद राज्य में हिंसा होने के आरोपों पर जवाब मांगा है। न्यायमूर्ति विनीत सरन और न्यायमूर्ति बीआर गवई की खंडपीठ ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया और याचिकाकर्ताओं की अधिवक्ता पिंकी आनंद के अनुरोध पर एनएचआरसी और राष्ट्रीय महिला व बाल आयोग को पक्ष बनाने पर सहमति जताई। सुप्रीम कोर्ट में यह जनहित याचिका दो वकीलों समेत पांच सामाजिक कार्यकर्ताओं ने लगाई है। इसमें पश्चिम बंगाल में चुनाव नतीजों के बाद हिंसा के आरोपों की जांच कराने के लिए एक एसआईटी गठित करने और कथित घटनाओं में शामिल दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने की मांग की गई है।

सर्वोच्च अदालत ने पश्चिम बंगाल से सात जून तक जवाब दाखिल करने और इस मामले की अगली सुनवाई जून के दूसरे सप्ताह में करने का निर्देश दिया। अरुण मुखर्जी और अन्य लोगों की ओर दाखिल याचिका में दावा किया गया है कि पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हुई हिंसा के कारण राज्य में बड़े पैमाने पर आंतरिक विस्थापन हुआ है। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि पुलिस और “राज्य प्रायोजित गुंडे” आपस में मिले हुए हैं, जिससे चुनाव के बाद की हिंसा की सही से जांच नहीं हो पा रही है।

जनहित याचिका में पलायन के स्तर और वजह का पता लगाने के लिए केंद्र को एक जांच आयोग गठित करने और राज्य सरकार को कथित पीड़ित परिवारों के पुनर्वास, नुकसान की भरपाई के लिए निर्देश देने की मांग की गई है।

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में चुनाव हारने के बाद से बीजेपी वहां पर चुनावी हिंसा होने के आरोप लगा रही है. वहीं, राज्य की सत्ताधारी टीएमसी का कहना है कि बीजेपी अपनी पराजय से बौखला गई है, इसलिए हिंसा को भड़काने के लिए फर्जी तस्वीरें का इस्तेमाल कर रही है.

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