बंगाल पर सवाल

पश्चिम बंगाल की ताजी घटनाएं कुछ सवाल खड़े कर रही हैं। शुक्रवार को राज्य की कानून व्यवस्था को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे भाजपाइयों पर पुलिस ने जिस बेतरह लाठीचार्ज किया, हालांकि यह सामान्य घटना है, लेकिन कुछ सवाल तो खड़े ही करती है। सामान्य इसलिए, क्योंकि हर राज्य में जिस पार्टी की सरकार होती है, वहां विरोधियों के साथ इसी तरह का सुलूक किया जाता है। सवाल यह कि क्या वास्तव में राज्य की कानून व्यवस्था वास्तव में चिंताजनक हो गयी है। यहां यह बात नहीं भूलनी चाहिए कि पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव होने हैं।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जहां एक बार फिर से सत्ता हासिल करने का लक्ष्य लेकर चल रही हैं, वहीं भाजपा उन्हें अपदस्थ करना चाहती है। यह अलग मुद्दा है और कानून व्यवस्था बिल्कुल जुदा। राज्यपाल जगदीप धनखड़ की मानें तो पश्चिम बंगाल में अलकायदा जैसे आतंकवादी संगठन ने जड़ें जमा ली हैं। कुछ गिरफ्तारियां भी हुई हैं। अगर यह सच है तो निश्चित रूप से गम्भीर चिंता का विषय है। ममता बनर्जी उस शख्सियत का नाम है जिसने पश्चिम बंगाल में मार्क्सवादी पार्टी के अभेद्य माने जाने वाले किले को ध्वस्त किया। ममता ने भले ही अपनी अलग पार्टी तृणमूल कांग्रेस नाम से स्थापित कर ली है, लेकिन इसके पहले वे कांग्रेसी थीं। अगर उनकी विचारधारा कांग्रेस से प्रभावित हो तो इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं। यह बात सभी जानते हैं कि कांग्रेस ने धर्मनिरपेक्षता के नाम पर कैसे-कैसे खेल खेले और अब भी खेल रही है। पश्चिम बंगाल बांग्लादेश की सीमा से जुड़ा राज्य है।

इंदिरा गांधी के कार्यकाल में भी बड़ी संख्या में बांग्लादेश के मुस्लिम शरणार्थियों ने यहां शरण पायी और कालांतर में भारत के नागरिक बन गये। इधर म्यांमार में उठा-पटक के दौरान रोहिंग्या शरणार्थी भी भारत में घुस आये और यहां मिल रहे जनसमर्थन के बूते पर स्थायी नागरिक बनने के प्रयास में हैं। चूंकि पश्चिम बंगाल म्यांमार का निकटस्थ देश है, ऐसे में स्वाभाविक है कि रोहिंग्याओं की संख्या वहां ज्यादा ही होगी, हालांकि वे अन्य प्रदेशों में भी शरण लिये हुए हैं और मजहब के नाम पर समर्थन भी हासिल कर रहे हैं। ममता सरकार सत्ता यथावत रखने के लिए उन्हें मतदाता बनाकर उनके वोट हासिल करना चाहती है। भाजपा इसका विरोध कर रही है। केन्द्र सरकार के नये नागरिकता संबंधी कानून का इसीलिए भाजपा विरोधी दल शासित राज्यों में विरोध किया जा रहा है।

पश्चिम बंगाल ऐसे ही राज्यों में एक है। अगर ममता सरकार रोहिंग्याओं या अन्य विदेशी घुसपैठियों को देश का मतदाता बनाना चाह रही है तो इसे देश हित में नहीं माना जायेगा। ऐसे में तो किसी भी देश के नागरिक भारत में घुसपैठ कर यहां बस जायेंगे, जिसका खामियाजा हमें बड़ी जनसंख्या के रूप में तो उठाना ही होगा, आतंकवाद के दुर्दांत रूप का भी सामना करना होगा। अगर अलकायदा ने यहां जड़ें जमायी हैं और गिरफ्तार किये गये लोग इस संगठन से जुड़े हैं तब तो ममता के तर्कों को सही नहीं माना जा सकता। ऐसे में भाजपा अगर राज्य की कानून व्यवस्था पर अंगुली उठाती है तब इसे अनुचित कौन कह सकता है, लेकिन अगर चुनाव के मद्देनजर इस तरह का प्रोपेगंडा किया जाता है तो इसे कोई भी सही नहीं ठहरायेगा। बहरहाल यह छानबीन का विषय है और यह पड़ताल भी भरोसेमंद एजेंसी के माध्यम से ही करायी जानी चाहिए।

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