कौन हैं राकेश टिकैत? पहले बने पुलिस कॉन्स्टेबल, फिर दो बार लड़े चुनाव में हुआ था ये हाल

लखनऊ। किसान आंदोलन में इस समय सबसे ज्‍यादा चर्चा राकेश टिकैत की हो रही है। दरअसल राकेश टिकैत अब खुलकर केंद्र सरकार के साथ-साथ उत्‍तर प्रदेश सरकार को भी चुनौती देते हुए नजर आ रहे हैं। उन्‍होंने यूपी पुलिस को गोली चलाने तक की धमकी दे दी है। ऐसे में अब कई लोग इस सवाल का जवाब तलाश रहे हैं कि आखिर कौन हैं राकेश टिकैत?

कौन हैं राकेश टिकैत?

बता दें कि गणतंत्र दिवस के दिन दिल्‍ली में हुई हिंसा का सबसे बड़ा जिम्‍मेदार राकेश टिकैत को माना जा रहा है। दरअसल राकेश टिकैत का एक वीडियो (जिसमें वे लोगों से लाठी डंडे लाने की अपील कर रहे हैं) जमकर वायरल हो रहा है। दिल्‍ली में हुई हिंसा के आरोप में 37 किसान नेताओ पर दर्ज हुए मामलों में राकेश टिकैत का भी नाम शामिल है।

कौन हैं राकेश टिकैत?

राकेश टिकैत भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं। राकेश टिकैत के बड़े भाई नरेश टिकैत भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष हैं। राकेश बीकेयू के अध्यक्ष रहे दिवंगत महेंद्र सिंह टिकैत के बेटे हैं। वह सिसोली के एक प्रसिद्ध किसान नेता हैं।

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राकेश टिकैत अभी आरजेडी के मौजूदा नेता हैं। वह उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में सशक्त नेता हैं। उनका जन्म मुजफ्फरनगर में 1975 में हुआ। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा सर ताशी नामग्याल हाई स्कूल से की और स्नातक की पढ़ाई उत्तर प्रदेश से की।

राकेश टिकैत का जन्म मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ। वह ऐसे ही मध्यमवर्गीय माहौल में पले-बढ़े हैं। राकेश ने मेरठ यूनिवर्सिटी से एमए किया। उसके बाद एलएलबी किया। वह दिल्ली पुलिस में कॉन्स्टेबल थे।

1993-94 में उनके पिता के नेतृत्व में किसान आंदोलन चल रहा था। आंदोलन बढ़ता जा रहा था। कहा जाता है कि दिल्ली पुलिस के अधिकारी जब यह आंदोलन खत्म नहीं करा पाए तो उन्होंने राकेश टिकैत पर दबाव बनाना शुरू किया। दबाव पड़ने पर उन्हें नौकरी छोड़ दी।

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दिल्ली पुलिस से कॉन्स्टेबल की नौकरी छोड़ने के बाद राकेश टिकैत भी किसान यूनियन में शामिल हो गए। उनके पिता की कैंसर से निधन हो गया। पिता की मौत के बाद उन्होंने और उनके भाई ने भारतीय किसान यूनियन की बागडोर संभाल ली।

हालांकि राकेश टिकैत का परिवार बालियान खाप से है। इस खाप का नियम है कि पिता की मौत के बाद परिवार का मुखिया घर का बड़ा होता है। चूंकि नरेश, राकेश से बड़े हैं इसलिए उन्हें बीकेयू का अध्यक्ष बनाया गया। कहा जाता है कि नरेश सिर्फ नाम के अध्यक्ष हैं, पार्टी के फैसले राकेश टिकैत ही लेते हैं। इसके अलावा वह ही पार्टी को लीड करते हैं।

राकेश टिकैत ने किसान यूनियन के जरिए राजनीति में आने का प्रयास किया। वह 2007 में मुजफ्फरनगर की खतौली विधानसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़े लेकिन वह यह चुनाव हार गए।

दूसरी बार उन्होंने फिर से भाग्य आजमाया और 2014 में अमरोहा से लोकसभा चुनाव लड़े। इस बार उन्हें राष्ट्रीय लोक दल पार्टी ने टिकट दिया, लेकिन वह दूसरी बार भी चुनाव हार गए।

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