अखिलेश यादव ने कानपुर से ही क्‍यों शुरू की विजय रथ यात्रा? यहां जानिए कानपुर से जुड़ा टोटका

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष और उत्‍तर प्रदेश के पूर्व मुख्‍यमंत्री अखिलेश यादव ने आखिर कानपुर से ही समाजवादी विजय रथ यात्रा का शुभारंभ क्यों किया? दरअसल देखा जाए तो उत्‍तर प्रदेश के 75 जिलों में कई अन्‍य ऐसे जिले हैं जहां समाजवादी पार्टी का वर्चस्‍व सबसे ज्‍यादा है, फिर अखिलेश ने कानपुर को क्‍यों चुना? तो बता दें कि इस सवाल का जवाब एक टोटके से जुड़ा हुआ है। दरअसल कानपुर से शुरू होने वाली विजय रथ यात्रा के बाद हमेशा जीत मिली है। आइए जानते हैं इस टोटके से जुड़ी पूरी कहानी…

विजय रथ यात्रा

कानपुर जिला समाजवादी पार्टी के लिए हमेशा से ही शुभ रहा है, फिर चाहे वह मुलायम सिंह यादव के लिए हो या फिर अखिलेश यादव के लिए। कानपुर जिले से विजय रथ यात्रा की शुरूआत सबसे पहले मुलायम सिंह यादव ने ही की थी। तब मुलायम सिंह यादव जनता दल में हुआ करते थे। उस समय जनता दल के नेता चौधरी देवीलाल के हाथों से सौंपा गया क्रांति रथ मुलायम सिंह यादव ने पूरे उत्‍तर प्रदेश में घुमाया था। इसके बाद ही मुलायम सिंह यादव साल 1989 में पहली बार उत्‍तर प्रदेश की कुर्सी पर विराजमान हुए थे।

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वहीं इसके बाद एक बार फिर समाजवादी पार्टी को कानपुर की याद तब आई जब वह प्रदेश में लगभग एक दशक से भी ज्‍यादा समय से सत्‍ता से बाहर रही। तब यह काम अखिलेश यादव को सौंपा गया और अखिलेश यादव ने साल 2001 में विजय रथ को फिर कानपुर से निकाला। इसका नतीजा यह रहा कि साल 2003 में एक बार फिर सपा की प्रदेश में सरकार बनी और मुलायम सिंह यादव उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री चुने गए।

इसके बाद साल 2011 में फिर अखिलेश यादव ने कानपुर से रथयात्रा निकाली और साल 2012 के विधानसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत से जीत हासिल की। लेकिन फिर साल 2016 में अखिलेश ने इस टोटके को बदलने का सोचा और उन्‍होंने अपनी यात्रा की शुरूआत के लिए लखनऊ को चुना। जिसका नतीजा हुआ कि प्रदेश में उन्‍हें बहुत बड़ी हार का मुंह देखना पड़ा। वहीं अब साल 2021 में अखिलेश ने फिर वही पुराना रास्‍ता और टोटका इस्‍तेमाल किया है। इसके बाद अब समाजवादी पार्टी को पूरी उम्‍मीद है कि साल 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी प्रचंड बहुमत हासिल करेगी।

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