अधर में क्यों लटकती हैं भर्तियां

अतुल कत्यायन

उत्तर प्रदेश यानी देश का वह सबसे बड़ा राजनैतिक सूबा, जिसने देश को नौ प्रधानमंत्री दिए। हालां‍कि, इसके बावजूद भी इस प्रदेश की स्थिति ऐसी है कि इसे इसका दुर्भाग्य ही कहा जाएगा। अगर यहां कोई सरकार शिक्षकों की कमी को पूरा करने की कोशिश करती है तो वह भर्तियां सालों-साल तक कोर्ट कचहरी के चक्कंर लगाया करती हैं। कुछ ऐसा हाल ही में भी देखने को मिला। यूपी में दो साल से 69 हजार शिक्षकों की भर्ती अधर में लटकी पड़ी थी। हालांकि, अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आखिरकार योगी सरकार ने 31277 सहायक अध्यापकों की मेरिट लिस्ट जारी कर दी है। 16 अक्टूबर से शिक्षकों को नियुक्ति पत्र मिलने शुरू हो जाएंगे।

नियुक्ति के लिए काफी समय से धक्के खा रहे अभ्यर्थियों को अब राहत मिली है। लेकिन यह मामला आज का नहीं है, साल 2018 दिसंबर में योगी सरकार ने सरकारी प्राइमरी स्कूलों में 69 हजार सहायक अध्यापकों के पद पर भर्ती निकाली थी। इन पदों के लिए जनवरी 2019 में परीक्षाएं हुईं, जिसमें लगभग चार लाख अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया था। परीक्षा के अगले दिन शासन ने परीक्षा के लिए मिनिमम मार्क्स तय कर दिए थे। इसमें सामान्य वर्ग के लिए 65 फीसदी और आरक्षित वर्ग के लिए 60 फीसदी अंक तय किये गए।

69 हजार शिक्षक भर्ती परीक्षा से पहले 68,500 पदों के लिए सहायक अध्यापकों की भर्ती परीक्षा हुई थी, जिसमें पास होने के लिए आरक्षित वर्ग के लिए 40 और सामान्य वर्ग के लिए 45 प्रतिशत का कटऑफ तय किया गया था। इसी को बढ़ाकर सामान्य वर्ग के लिए 65 और आरक्षित वर्ग के लिए 60 फीसदी किया गया।

इसके बाद शिक्षामित्र और कुछ अन्य अभ्यर्थी इस मामले को लेकर हाइकोर्ट पहुंच गए। उन्होंने कहा कि परीक्षा के बाद न्यूनतम अंक तय करना गलत है। कुछ अभ्यर्थी 40 और 45 फीसदी न्यूनतम अंक निर्धारित करने की मांग करने लगे। रामशरण मौर्य बनाम राज्य सरकार मामले में हाईकोर्ट ने 29 मार्च को राज्य सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया। भर्ती के लिए योगी सरकार को हाईकोर्ट से 3 महीने का समय मिला।

वहीं, हाईकोर्ट के इस फैसले के विरोध में कुछ शिक्षामित्र सुप्रीम कोर्ट चले गए। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षक भर्ती की 3 जून से 6 जून तक होने वाली काउंसलिंग पर रोक लगा दी। सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षामित्रों की अपील पर 9 जून 2020 को मामले में सुनवाई की। कोर्ट ने 69 हजार में से 37,339 पदों को होल्ड कर दिया और बाकि 31,661 पदों पर भर्ती करने का आदेश दे दिया। राज्य सरकार ने 24 सितंबर को आदेश जारी करते हुए 31,661 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए थे, लेकिन एससी वर्ग में कम अभ्यर्थी पात्र होने के कारण केवल 31,277 पदों पर ही चयन प्रक्रिया की जा रही है।

सरकारी आंकड़ों की मानें तो, उत्तर प्रदेश में 17,602 सरकारी स्कूल ऐसे हैं, जहां सिर्फ एक ही शिक्षक के भरोसे शिक्षा व्यवस्था चल रही है। ये शिक्षक पूरे स्कूल का मैनेजमेंट और शिक्षा अकेले की संभाले हुए हैं। प्रदेश के इन हालातों को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहां के बच्चों का भविष्य कैसा रहने वाला है। प्राथमिक शिक्षा के लिए चलाई जा रही अनेक महात्वाकांक्षी योजनाओं के बावजूद देश में पांचवीं तक के छात्रों की संख्या में पिछले एक साल में ही 23 लाख बच्चों की कमी आई है, जिसमें अकेले उत्तर प्रदेश की कक्षाओं से 7 लाख बच्चे घट गए हैं।

पिछले साल जारी हुई एक रिपोर्ट की मानें तो देशभर में पांचवीं और आठवीं में क्रमश: 13.24 करोड़ और 6.64 करोड़ यानी कुल 19.88 करोड़ बच्चे प्रारम्भिक शिक्षा हासिल कर रहे हैं। लेकिन इतनी बड़ी तादाद में बच्चों का प्राथमिक स्कूल से कम होना सवाल खड़ा करता है कि आखिर इतनी सुविधाओं के बावजूद ऐसा क्यों? कमी कहां हैं? या फिर यह सभी सुविधाएं हवा-हवाई साबित हो रही हैं? वहीं माध्यमिक व उच्चस्तरीय शिक्षा का भी हाल-बेहाल है। छात्रों को हायर एजुकेशन के लिए अक्सर प्रदेश को छोड़कर दूसरे प्रदेशों का रुख करना पड़ता है। जो छात्र यहां पढ़ते भी हैं उन्हें नौकरी करने फिर बाहर ही जाना पड़ता है।

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