क्या जयंत चौधरी संभाल पाएंगे सियासत की विरासत?

लखनऊ. पश्चिमी यूपी की सियासत में जाट और मुस्लिम वोट बैंक काफी अहम है.ऐसे में पश्चिमी यूपी की राजनीति धुरी रहे चौधरी चरण सिंह व अजीत चौधरी की विरासत अब जयंत चौधरी के पास आई है. जानकार कहते हैं कि पश्चिमी यूपी में करीब 140 से भी ज्यादा विधानसभा सीटें हैं. जिनमे से 23 सीटें ऐसी हैं जहां जाट समुदाय हार जीत तय करने कि स्थिति में है .लेकिन सिर्फ़ जाट वोट के भरोसे जीत का दावा नही किया जा सकता. क्योंकि पिछले लोकसभा व विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय लोक दल को झटका लग चुका है. यही वजह है कि रालोद मुसलमानों को भी साथ लेकर चलना चाहती है.

चौधरी चरण सिंह की छवि किसानों के मसीहा के रूप में है. इसी छवि को बरक़रार रखने के लिए उनके पोते जयंत चौधरी किसानों के मुद्दे पर मुखर होकर बोलते हैं.किसान विरोधी बिल के विरोध में किसान आन्दोलन के समर्थन किसानों के साथ नजर आते हैं.किसानो की महापंचायत में हिस्सा लेकर किसानों के साथ जाट वोट बैंक को साधने की पूरी कोशिश रालोद कि ओर से हो रही है.साथ की मुसलमानों को भी अपने पाले में करने के लिए मोब लीन्चिंग जैसे मुद्दों को भुनाने का काम भी रालोद कर रही है. सामाजिक न्याय रैली आयोजित करके रालोद दलितों को एपनिया पक्ष में करने के लिए प्रयासरत है.

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जयंत चौधरी पिछले दो लोकसभा चुनाव हार चुके हैं.हालांकि 2009 में वे जीतकर संसद पहुचे थे.फिलहाल रालोद यूपी आगामी विधानसभा की तैयारियों में लगी है. रालोद ने सपा से गठबंधन किया है.

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