पश्चिमी उत्तर-प्रदेश में शीतलहर का प्रकोप, मौसम विभाग ने जारी की चेतावनी

शीतलहर

लखनऊ: पहाड़ों से चल रहीं बर्फीली हवाओं के चलते उत्तर प्रदेश के ज्यादातर जनपदों में शीतलहर जारी है। आगामी दो से तीन दिनों में स्थानीय स्तर पर हल्की बारिश की भी संभावना है। शनिवार को बरेली प्रदेश का सबसे अधिक ठंढा (3.7 डिग्री सेल्सियस) जनपद रहा। मौसम विभाग के मुताबिक पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चक्रवात सक्रिय है जिससे तापमान गिरेगा और सर्दी में बढ़ोत्तरी होगी। वहीं गंगा यमुना सहित अन्य ​नदियों के तराई वाले क्षेत्रों में कोहरे का भी प्रकोप बढ़ेगा और वाहन सवारों को परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।

चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कानपुर के मौसम वैज्ञानिक डाॅ. एसएन पांडेय ने शनिवार को बताया उप्र में तीन जनवरी तक इसी तरह से शीत लहर का प्रकोप जारी रहने की संभावना है, क्योंकि इस दौरान उप्र के अधिकांश भागों में पश्चिमी और उत्तर पश्चिमी दिशा से ठंडी और शुष्क हवाओं का प्रभाव बना रहेगा। पीलीभीत, बरेली, नजीबाबाद, सहारनपुर, मेरठ, मुजफ्फरनगर, सीतापुर, लखनऊ समेत कई जगहों पर तापमान में गिरावट इसी तरह से जारी रहेगी। इन भागों में कुछ स्थानों पर पाला पड़ने का भी खतरा बना रहेगा। पश्चिमी उप्र के भागों में पांच जनवरी तक कुछ स्थानों पर गरज के साथ हल्की वर्षा होने या ओलावृष्टि की आशंका है। बारिश से आगरा, मथुरा, अलीगढ़, गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद और आसपास के ज़िले प्रभावित हो सकते हैं, जबकि लखनऊ और कानपुर से लेकर बहराइच, अयोध्या, प्रतापगढ़, बांदा, चित्रकूट, फतेहपुर, प्रयागराज, जौनपुर, आजमगढ़, वाराणसी, गोरखपुर, देवरिया, बस्ती, सिद्धार्थ नगर, मिर्जापुर, भदोही, गाजीपुर समेत पूर्वी जिलों तक पूरे सप्ताह मौसम मुख्यतः साफ और शुष्क रहेगा। इन भागों में पश्चिमी हवाएं लगातार चलती रहेंगी जिसके कारण शीतलहर का प्रकोप जारी रह सकता है। इन भागों में कोहरा भी पूरे सप्ताह मध्यम से घना रहेगा, जिससे दिन के तापमान में भी कमी के कारण सर्दी से राहत मिलने के संकेत नहीं हैं।

प्रमख शहरों का इस तरह रहेगा अधिकतम व न्यूनतम तापमान

आगरा 17-7 अलीगढ़, 13-9 बहराइच, 18-6, बांदा 24-5, बरेली 15-3.7, फैजाबाद 22-5, नोएडा 17-5, गाजियाबाद 18-5, गोरखपुर 21-5, झांसी 22-7, लखनऊ 20-6 प्रयागराज 22-9, वाराणसी 22-7, कानपुर 18-6 डिग्री सेल्सियस तापमान रहने की संभावना है।

पाला से बचाने के लिए फसलों की करें सिंचाई

मौसम वैज्ञानिक ने बताया कि प्रदेश के विभिन्न भागों में जारी कड़ाके की सर्दी और शीतलहर के बीच पश्चिमी उप्र के तराई क्षेत्रों में कुछ हिस्से ऐसे होंगे जहां पाला पड़ने की भी संभावना है। इसके चलते कई फसलों को नुकसान हो सकता है। पाले से बचाने के लिए फसलों में पहले से ही सिंचाई करें। नमी के कारण आलू की फसल में विशेष रूप से पाला लगने की आशंका है। लक्षण दिखाई देने पर मैनकोज़ेब 75 प्रतिशत  डब्ल्यूपी .2 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से घोल कर छिड़काव करें। खड़ी फसलों में आवश्यकतानुसार सिंचाई करें। प्याज की रोपाई करने के लिए मौसम अभी उपयुक्त है, रोपाई से पहर खेतों में जैविक खाद और और पोटाश उर्वरक देकर खेत ठीक से तैयार करें। फसलों में खर-पतवारों की निगरानी करते रहें व उत्पत्ति होने पर खेतों से निकाल कर नष्ट करें। इस समय सब्जियों की फसलों में पत्ती काटने वाले व छेदक कीटों का प्रकोप भी हो सकता है और संक्रमण बढ़ने पर उपचार करें।

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