खरी-खरी : तुम्हीं हो माता, पिता तुम्हीं हो

उर्मिल कुमार थपलियाल

महान पिताओं की परम्परा में हम किसी से दो जूते पीछे नहीं है। हमारे बापू जैसा राष्ट्रपिता किसी और का हो ही नहीं सकता। ये बात अलग है कि हमारे यहां जो राष्ट्रपति होता है वो राष्ट्रपिता नहीं होता। दोनों के कर्म में फर्क है। बापू के पुत्रों में भले ही कोई एकआध नालायक निकला हो मगर बाकी लाचार हैं। और पितृपक्ष में बापू की पूड़ी रखते हैं। अब तो कई बजरंगी भी बापू को अपना बाप मानने लगे हैं। यू हमारे यहां ताऊ जी भी पिता समान होते हैं पर वो लगते नहीं। गधे को ताई बनाने की मसल आज तक मेरी समझ में नहीं आई।

महान राष्ट्र में ही राष्ट्रपिता होते हैं टुच्चे-मुच्चे के नहीं होते। उनके चक्कर में कभी हम कस्तूरबा को भी याद करते हैं पर हमने कभी उन्हें राष्ट्रमाता नहीं कहा। सही बात है जो पूरे राष्ट्र का बात होता है वह अपने निजी बच्चों का ध्यान नहीं रख पाता। राष्ट्रपिता की वेदना को राष्ट्रपति कभी नहीं जान पाते। हमारे बापू इसलिए भी महान राष्ट्रपिता है कि उनके बिगड़ैल बच्चों ने उन्हें हलकान कर रक्खा है।

नालायक बच्चों की आदतें ज्यादा बिगड़ रही हैं। वो अपने बाप को अनवान्टेड और फिजूल का कह रहे हैं। बाप वो जो लगातार जेब खर्च देता रहे। ऐसा कोई बाप नहीं जिसने कभी अपने बच्चों को बोतल से दूध न पिलाया हो मगर वही बच्चे बड़े होकर बाप के सामने बोतल खोल लेते हैं।

पहले के जमाने में डाक्टर का बेटा डाक्टर होता था। अब कम्पाउन्डर लायक नहीं होता। जेनेरेशन गैप में भी घपला होने लगा है। मुझे केटरीना कैफ पसंद है तो मेरे बीस साल के बेटे को भूतपूर्व अभिनेत्री निरूपमा राय। अब भाई साहब ओजोन की परत न फटे तो क्या करें। आज का बेटा अपने बाप से दस जूते आगे और पोता बीस जूते आगे न हो तो डी.एन.ए. कराना जरूरी हो जाता है। यूं अपने पुत्र कमाल के कारण ही कबीर का बेटा डूब गया था जिससे मां के दूध के बजाय डिब्बे का दूध पिया हो वही इस दोहे का असली अर्थ बता सकता है कि बूढ़ा पुत कबीर का, उपजा पूत कमाल।

मेरे एकमात्र पिता बड़े पियक्कड़ रहे। एक दिन उचित समय देख कर उनसे कहा- पिता जी प्लीज, मेरे भविष्य के लिए मत पीजिए। पिता बोले- बेटा में तेरे भविष्य के लिए नहीं, अपने वर्तमान के लिए पीता हूं। पता नहीं क्यूं मेरी निगाहे किचन में काम कर रही अपनी मां पर चली गईं।ये एक हादसा भी हो सकता है।

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