खून से खत लिखकर प्रधानमंत्री को भेजा, अनोखे तरीके से बुंदेलों ने मांगा अलग राज्य

महोबा । अलग बुंदेलखंड राज्य के लिए आंदोलन कर रहे बुंदेली समाज के कार्यकर्ताओं ने सोमवार को यहां रिकार्ड 23वीं बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खून से खत लिख कर मार्मिक अपील की।

प्रधानमंत्री

आंदोलनकारियों ने पीएम से मांग की कि वह बुन्देलों को उनका राज्य वापस देकर उस ऐतिहासिक भूल को सुधारे जो 65 साल पहले एक नवंबर,1956 को तत्कालीन नेहरू सरकार ने बुंदेलखंड को भारत के नक्शे से मिटाकर की थी।

बुंदेली समाज के कार्यकर्ताओं ने आज काला दिवस मनाकर बुंदेलखंड के विभाजन पर अपना विरोध प्रदर्शित किया। काले वस्त्र धारण कर यहां शहीद जवान राकेश चौरसिया के समाधि स्थल पर जुटे बुंदेली समाज के सैकड़ो कार्यकर्ताओ ने प्रथक राज्य की मांग को लेकर जमकर नारेबाजी की और फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने खून से खत लिखे। बुन्देलों ने अपने पत्र में यहां की प्रमुख समस्याओं पिछड़ेपन,बेरोजगारी आदि का जिक्र करते हुए बुंदेलखंड को अलग राज्य बनाकर विकास की मुख्य धारा से जोड़ने की मांग की।

बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकर ने बताया कि आज का दिन बुंदेलखंड के इतिहास का सबसे काला दिन है। आज ही नेहरू सरकार ने मध्यप्रदेश के गठन के लिए बुंदेलखंड राज्य की बलि दे दी। आधे हिस्से को उत्तर प्रदेश में और आधे हिस्से को मध्यप्रदेश में बांट दिया। तभी से बुंदेलखंड दो राज्यों के बीच में पिस रहा है। दोनों सरकारें अब खूबसूरत बुंदेलखंड को खनन हब बनाकर पूरी तरह से बर्बाद करने में लगी हैं। यहां के  पहाड़, नदियां, जंगल व ऐतिहासिक विरासतें सब संकट में हैं। अगर हाईकोर्ट ने रोक न लगाई होती तो हीरे के लिए बुंदेलखंड का बक्सवाहा जंगल भी कट जाता।

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महामंत्री अजय बरसैया ने कहा कि बुंदेलखंड को बचाने का एक ही समाधान है अलग राज्य निर्माण। आज शहीद राकेश चौरसिया के भाई सुरेश, गया प्रसाद, अमरचंद विश्वकर्मा, हरिओम निषाद, पूर्व फौजी कृष्णा शंकर जोशी, पूर्व सभासद प्रेम साहू, अरूण तिवारी, सुरेश बुंदेलखंडी, सुरेन्द्र शुक्ला व देवेंद्र तिवारी समेत तमाम बुंदेलों ने खत लिखने के लिए अपना खून दिया।

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