योगी सरकार ने मांगी 2940 पेड़ काटने की इजाजत, सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- क्या टेढ़ी मेढ़ी नहीं रखी जा सकतीं सड़कें?

नई दिल्ली। मथुरा में कृष्ण गोवर्धन रोड प्रोजेक्ट पर उच्चतम न्यायालय ने सवाल उठा दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सड़क बनाने के समय पेड़ क्यों काटा जाए? अदालत ने सुझाया कि पेड़ों को काटने के बजाय बेहतर तो ये होगा कि सड़कों को टेढ़ा—मेढ़ा रखा जाए। योगी सरकार की उस याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने सुझाव दिया जिसमें योगी सरकार ने मथुरा में कृष्णा गोवर्धन सड़क परियोजना के लिए 2940 पेड़ों की कटाई की इजाजत मांगी थी। सुप्रीम कोर्ट ने योगी सरकार से कहा है कि वह पता लगाए कि सड़क बनाने के लिए कितने पेड़ काटने की योजना है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने टीटीजेड इलाके में लेदर पार्क बनाने की राज्य सरकार की योजना पर कोर्ट सलाहकार और याचिकाकर्ता से रिपोर्ट मांगा है।

सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली बेंच ने बुधवार को कहा कि सड़क बनाते वक्त पेड़ों को काटने के बजाय रास्तों को टेढ़ा मेढा रखा जाए तो बेहतर होगा। इससे स्पीड भी कम रहेगी और इससे वाहनों की ज्यादा स्पीड के कारण होने वाली घटनाओं में भी कमी आएगी। चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अगुवाई वाली बेंच ने आश्चर्य जताया कि आखिर पेड़ों को ही हमेशा क्यों काटा जाना जरूरी है। चीफ जस्टिस बोबडे ने कहा कि पेड़ काटकर रोड को सीधी रखना जरूरी क्यों है। क्या सड़के टेढ़ी मेढ़ी नहीं रखी जा सकती? क्या सीधी रेखा में ही सड़कें बनाना जरूरी है? क्यों सड़कें टेढ़ी नहीं हो सकती? ऐसा किया जाए तो स्पीड कम रहेगी और वाहन की स्पीड कम होने से दुर्घटनाएं कम होगी और लोगों की जान बचाई जा सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये बात साफ है कि अगर 100 साल पुराने पेड़ को काटा जाता है तो उसकी भरपाई असंभव है। अदालत ने कहा कि पेड़ों का आंकलन और मूल्यांकन के लिए ये देखा जाना जरूरी है कि पेड़ की जो बची हुई जिंदगी थी उसमें वह कितना ऑक्सीजन छोड़ता। उसके ऑक्सीजन उत्सर्जन की क्षमता कितनी रही होगी। अदालत ने राज्य सरकार से उन पेड़ों का आंकलन और मूल्यांकन करने को कहा है कि वह अपने जीवित रहते कितना ऑक्सीजन उत्सर्जित करेंगे। वैसे सुनवाई के दौरान पीडब्ल्यूडी की ओर से कहा गया कि जो पेड़ काटे जाएंगे उसकी भरपाई के लिए दूसरी जगह पेड़ लगाए जाएंगे ताकि पर्यावरण के नुकसान न हों और जो भी पेड़ कटें उसकी भरपाई हो सके। तब सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि हम केवल पेड़ों की गिनती के हिसाब से भरपाई को नहीं मानेंगे। ये पता नहीं कि पेड़ कैसा होगा।

सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट सलाहकार एडीएन राव ने कहा कि नेट प्रजेंट वैल्यू के हिसाब से पेड़ों का मूल्यांकन होता है। अदालत ने यूपी सरकार से कहा है कि वह दो हफ्ते में नेट प्रजेंट वैल्यू पर विचार कर जवाब दाखिल करें। यूपी सरकार इस बात का आंकलन करे और पता करे कि सड़क बनाने के लिए कितने पेड़ काटने की योजना है। अगली सुनवाई के लिए कोर्ट ने चार हफ्ते के बाद की तारीख तय की है।

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