कोरोना काल में ‘जीवनदायिनी’ बनी योगी सरकार की ‘नेशनल मोबाइल मेडिकल यूनिट’

प्रदेश के लोगों को घर बैठे निशुल्क इलाज देने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा साल 2019 में शुरू की गई नेशनल मोबाइल मेडिकल यूनिट (एनएमएमयू) कोरोना काल में जीवनदायिनी बनकर सामने आई है। इस सचल अस्पताल से अब तक प्रदेश के 45 लाख से अधिक लोगों को निशुल्क इलाज उपलब्ध कराया जा चुका है। कोविड काल में 15 लाख से अधिक लोगों की सैंपलिंग और स्क्रीनिंग करने में इस सचल अस्पताल ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

प्रदेश के 53 जिलों 170 एनएमएमयू तैनात हैं। ये अत्याधुनिक जांच के उपकरणों से लैस हैं। इसमें एक वरीष्ठ चिकित्सक के साथ एक फार्मासिस्ट, एक लैब टेक्नीशियन और एक स्टॉफ नर्स हर समय मौजूद रहती हैं। यह वाहन गांव में एक निश्चित स्थान पर पहुंचता है और वहीं पर लोगों को उपचार मुहैया कराया जाता है।

इस कोरोना काल में यह नेशनल मोबाइल मेडिकल यूनिट (एनएमएमयू) ग्रामीणों के बीच अपनी अलग पहचान बनाने में सफल रही हैं। पिछले तीन महीनों में यूपी में कुल 6,92,562 लोगों इन वैन के जरिए ओपीडी सुविधाएं मुहैया कराई गईं, जबकि लखनऊ में कुल 8783 लोगों को घर बैठे निशुल्क इलाज मिला है।

इस योजना को 18 फरवरी 2019 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुभारंभ इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान से शुरू किया था। इस छोटे सचल अस्पताल में नेब्यूलाइजर, इलेक्ट्रिक निडिल डिस्ट्रायर, ईसीजी मशीन, एम्बू बैग, सेमी आटोमेटिक बायोकेमेस्ट्री एनालाइज़र, आटोस्कोप, टोनोमीटर, ग्लूकोमीटर, स्टेलाइज़र, व्यू बॉक्स, ड्रेसिंग ड्रम, आपथेल्मोस्कोप, सेंट्रीफ्यूज मशीन, लेरिंजोस्कोप, माइक्रो टाइपिंग सेंट्रीफ्यूज और हीमोग्लोबिन जैसे आधुनिक उपकरण मौजूद हैं। कोरोना काल में इसमें एंटीजन टेस्ट और इंफ्रारेड थर्मामीटर जैसी सुविधाओं को जोड़ा गया है।

नेशनल मोबाइल मेडिकल यूनिट किसी गांव में जिस स्थान पर लोगों को इलाज मुहैया कराती है, अगले 15 दिन बार उसी स्थान पर दोबारा पहुंचती है। इससे रोगियों को डॉक्टर की सलाह और दवा पाने में निरंतरता बनी रहती है। इस नियमित इलाज से लोगों को बीमारियों से छुटकारा मिल जाता है। इस दौरान सामने आने वाले गंभीर रोगियों को बड़े अस्पतालों में इलाज के लिये रेफर भी किया जाता है। कोरोना काल में इन सचल अस्पताल के माध्यम से गांव में स्क्रीनिंग और  एंटीजन के माध्यम से जांच करने का काम किया जा रहा है।

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