एक नए राजनीतिक अवतार में सपा सांसद डिंपल | Dimpal Yadav

आशीष वाजपेयी |

नेताजी मुलायम सिंह यादव की सौम्य-सुशील बहू, पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के साथ कंधा से कंधा मिलाकर चलती पत्नी, मैनपुरी की समाजवादी सांसद डिंपल यादव का 20 जुलाई को नया राजनीतिक अवतार हुआ। दिल्ली के जंतर मंतर पर चल रहे काकरोच जनता पार्टी के धरना मंच पर पहली बार डिंपल तब दिखीं जब सोनम वांगचुक को धरनास्थल से उठाकर सफदरजंग अस्पताल पहुंचाया गया। वह मंच पर किसी अभिभावक की तरह प्रकट हुईं और कुछ देर बातचीत के बाद चली गईं। बदला रूप 20 मार्च को तब देखने को मिला जब वे आंदोलनरत छात्रों-युवाओं के संसद मार्च में पार्टी की युवा सांसद इकरा हसन और प्रिया सरोज के साथ मार्च करती दिखीं। कुछ ही देर बाद जब सुरक्षा बलों ने छात्रों-युवाओं को लठियाना शुरू किया तो डिंपल की जो तस्वीरें नजर आईं, उसने इस बात की इबारत लिख दी कि डिंपल संसद से लेकर सड़क तक लड़ने वाली खाटी समाजवादी नेता बन चुकी हैं।

भारतीय राजनीति में सपा सांसद डिंपल यादव की पहचान हमेशा से एक सुसंस्कृत, बेहद शालीन और गंभीर राजनेता की रही है। दिवंगत नेताजी मुलायम सिंह यादव की बहू और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की पत्नी होने के नाते, उन्होंने अब तक संसदीय मर्यादाओं के भीतर रहकर ही अपनी बात रखी थी, लेकिन 20 जुलाई को दिल्ली की सड़कों पर जो कुछ देखने को मिला, वह समाजवादी पार्टी की मूल ‘आंदोलनकारी और जुझारू’ छवि के बिल्कुल अनुकूल था। छात्रों-युवाओं के इस ऐतिहासिक संसद मार्च में शामिल होकर, डिंपल यादव ने अपने पूरे राजनीतिक और विधायी जीवन में पहली बार इस प्रकार का आक्रामक रूप दिखाया है।

दिल्ली का जंतर-मंतर पिछले कई दिनों से छात्रों के आक्रोश का केंद्र बना हुआ था, जहां सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी अनशन पर बैठे थे। सोमवार को सीजेपी (काकरोच जनता पार्टी) के आह्वान पर हजारों छात्र एकजुट होकर संसद की तरफ बढ़ रहे थे। इस आंदोलन को तब बड़ी ताकत मिली, जब सपा सांसद डिंपल यादव खुद अन्य सांसदों की अगुवाई करते हुए संसद परिसर से जंतर-मंतर की ओर पैदल मार्च पर निकल पड़ीं। डिंपल यादव के हाथों में ‘पेपर लीक’ और ‘नीट है या चीट है’ के पोस्टर थे। वह खुद सरकार के खिलाफ और छात्रों के पक्ष में जोरदार नारे लगा रही थीं। दिल्ली पुलिस ने जब संसद मार्च को रोकने के लिए बल प्रयोग किया, आंसू गैस के गोले छोड़े और छात्रों पर लाठीचार्ज किया, तो डिंपल यादव पीछे नहीं हटीं। उन्हें इकरा हसन और प्रिया सरोज जैसे युवा सांसदों के साथ दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया।

अखिलेश यादव ने जहां विपक्ष के नेता के तौर पर संसद के भीतर सरकार को घेरा हुआ था, वहीं डिंपल यादव ने जमीन पर उतरकर पारंपरिक समाजवादी तेवर को पुनर्जीवित किया। विश्लेषकों का मानना है कि डिंपल यादव का यह रूप केवल एक तात्कालिक विरोध नहीं था, बल्कि उनकी बदलती छवि का एक बड़ा प्रस्थान बिंदु है। अब वह सिर्फ एक संभ्रांत राजनेता नहीं, बल्कि जमीन पर संघर्ष करने वाली एक जुझारू नेत्री के रूप में स्थापित हो चुकी हैं। हिरासत से छूटने या आंदोलन के दौरान उन्होंने सरकार पर तीखे विधायी और राजनीतिक हमले किए। उन्होंने देश की मौजूदा स्थिति को “दुर्भाग्यपूर्ण” और सरकार को “अहंकारी तथा क्रूर” बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रष्ट व्यवस्था पूरी परीक्षा प्रणाली और सरकारी तंत्र भ्रष्टाचार में डूबा हुआ है, जिसका खामियाजा देश का युवा मानसिक तनाव झेलकर भुगत रहा है।

संसद मार्च में निभाई गई इस ऐतिहासिक भूमिका के बाद डिंपल यादव की देशव्यापी तारीफ हो रही है। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि समय आने पर वह केवल विधायी बहसों तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि अन्याय के खिलाफ अग्रिम पंक्ति में खड़े होकर लाठियों और गिरफ्तारियों का सामना भी कर सकती हैं। उनका यह आक्रामक और संवेदनशील अवतार आने वाले समय में उत्तर प्रदेश और देश की राजनीति में समाजवादी पार्टी को एक नई और अधिक धारदार दिशा देने का काम करेगा।

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