सरसों के तेल में : मिलावट एक गंभीर समस्या

(न्यू दिल्ली) सुधीर शर्मा सरसों के तेल में मिलावट
तेल में मिलावट एक गंभीर समस्या है, जिसमें शुद्ध खाने के तेल में सस्ते या हानिकारक पदार्थ मिलाकर बेचा जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य मुनाफा कमाना होता है। भारत में FSSAI (Food Safety and Standards Authority of India) के अनुसार, यह जानबूझकर किया जाता है, जिससे तेल की गुणवत्ता, स्वाद और सुरक्षा प्रभावित होती है। सरसों, नारियल, मूंगफली, जैतून या सोयाबीन तेल जैसे महंगे तेलों में सबसे ज्यादा मिलावट होती है।
मिलावट के मुख्य प्रकार और उदाहरण
सरसों के तेल में आर्जेमोन तेल (Argemone Oil): आर्गेमोन मेक्सिकाना के बीजों का तेल मिलाया जाता है। रंग और घनत्व एक जैसा होने से आसानी से मिल जाता है।
कॉटनसीड तेल (Cottonseed Oil): सस्ता तेल महंगे तेल में मिलाया जाता है।
मिनरल ऑयल या मोबाइल ऑयल (Lube Oil): पेट्रोलियम उत्पाद या इंजन ऑयल मिलाना।
कैस्टर ऑयल (Castor Oil): रंगहीन लेकिन हानिकारक।
करंजिया ऑयल (Karanja Oil): जंगली पेड़ का तेल।
पाम ऑयल या अन्य सस्ते तेल: महंगे तेल (जैसे जैतून या नारियल) में मिलाया जाता है।
वेनस्पति घी या हाइड्रोजनीटेड फैट: शुद्ध तेल में मिलाकर।
रिसाइकल्ड यूज्ड कुकिंग ऑयल (RUCO): बार-बार इस्तेमाल किया तेल (TPC >25% होने पर हानिकारक)।
अन्य: सायनाइड, भारी धातु, कीटनाशक या एफ्लाटॉक्सिन।
FSSAI के 2020 सर्वे में कुछ तेलों (खासकर सरसों और सोयाबीन) में गुणवत्ता और सुरक्षा पैरामीटर पर 24% से ज्यादा नमूने फेल पाए गए थे।
स्वास्थ्य पर प्रभाव (Health Risks)
तीव्र प्रभाव (Acute): आर्जेमोन तेल से एपिडेमिक ड्रॉप्सी (Epidemic Dropsy) – सूजन, दिल की समस्या, ग्लूकोमा, अंधापन और यहां तक कि मौत। 1998 दिल्ली महामारी में 60+ मौतें और 3000+ लोग प्रभावित हुए थे।
दीर्घकालिक प्रभाव (Chronic): कैंसर (गॉल ब्लैडर, लीवर), लीवर डैमेज, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, पैरालिसिस, एलर्जी, मोटापा और हार्मोन असंतुलन। रिसाइकल्ड तेल से टोटल पोलर कंपाउंड्स (TPC) से एथेरोस्क्लेरोसिस और यकृत विकार।
बच्चों और गर्भवती महिलाओं में ज्यादा खतरा।
घरेलू तरीके से मिलावट की पहचान (FSSAI और DART Recommended Simple Tests)
सुरक्षित घरेलू टेस्ट (कोई केमिकल नहीं):
नारियल तेल टेस्ट: पारदर्शी ग्लास में तेल लें, फ्रिज (5-10°C) में 30-90 मिनट रखें। शुद्ध तेल पूरी तरह जम जाता है। मिलावट वाले में अलग लेयर दिखती है।
पेपर टेस्ट: सफेद कागज पर कुछ बूंदें डालें, सूखने दें। शुद्ध तेल समान translucent स्पॉट छोड़ता है। चिकना रिंग = मिलावट।
फ्रीजर टेस्ट: जैतून तेल को फ्रीजर में 30 मिनट रखें – शुद्ध थोड़ा जमना शुरू हो जाता है।
सेंसरी चेक: रंग एकसमान, स्वाद शुद्ध, महक ताजा होनी चाहिए। असामान्य रंग/गंध/स्वाद = मिलावट।
लेबल और खरीदारी टिप्स (FSSAI Advice):
एक ही प्रकार का तेल लिखा हो (मल्टी-ऑयल ब्लेंडिंग संदेहास्पद)।
FSSAI लाइसेंस, expiry date, सील चेक करें। टूटी सील या बहुत सस्ता = खतरा।
प्रतिष्ठित ब्रांड से खरीदें।
लैब/केमिकल टेस्ट (घर पर न करें, FSSAI लैब या मोबाइल वैन में करवाएं – खतरनाक रसायन):
आर्जेमोन: सैलिसिलिक एसिड + HNO₃ + H₂SO₄ → क्रिमसन रेड रंग।
कॉटनसीड: हेल्फेन टेस्ट → लाल रंग।
मिनरल ऑयल: अल्कोहलिक पोटाश → टर्बिडिटी।
मोबाइल ऑयल: अल्कोहलिक KOH + Gibbs reagent → नीला रंग।
रैनसिडिटी: फ्लोरोग्लुसिनॉल + HCl → लाल/गुलाबी रंग।
FSSAI के DART (Detect Adulteration with Rapid Test) ऐप/वेबसाइट पर और टेस्ट उपलब्ध हैं।
रोकथाम और कानूनी प्रावधान
FSS Act 2006 के तहत मिलावट पर भारी जुर्माना और जेल।
FSSAI ने RUCO अभियान शुरू किया – इस्तेमाल किया तेल बायोफ्यूल में बदलें।
हमेशा FSSAI नोटिफाइड लैब से टेस्ट करवाएं।
घर पर तेल बार-बार न गरम करें (TPC 25% से ऊपर न हो)।
सलाह: स्वास्थ्य पहले! सस्ते तेल से बचें, प्रमाणित पैकेज्ड तेल लें और संदेह हो तो स्थानीय FSSAI ऑफिस या कंज्यूमर फोरम में शिकायत करें। मिलावट से बचाव से ही स्वस्थ रह सकते हैं।
अधिक जानकारी के लिए FSSAI वेबसाइट (fssai.gov.in) या eatrightindia.gov.in/DART देखें।

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