
न्यू दिल्ली ( सुधीर शर्मा)बाजार में कई बार एलोवेरा जूस को करेला (कड़वा लौकी) जूस के नाम पर बेचा जाता है या दोनों को मिलाकर बेचा जाता है, खासकर अनऑर्गनाइज्ड या लोकल ब्रांड्स में। यह एक तरह का मिसलीबलिंग या एडल्टरेशन जैसा मामला है।
क्यों होता है ऐसा?
करेला जूस बहुत कड़वा होता है और डायबिटीज (शुगर) कंट्रोल के लिए लोग इसे खूब खरीदते हैं। इसलिए इसका दाम अच्छा मिल जाता है।
एलोवेरा जूस अपेक्षाकृत सस्ता, आसानी से उपलब्ध और प्रोसेस करना आसान होता है। इसका स्वाद भी हल्का कड़वा-एसिडिक होता है, जो करेले के स्वाद से मिलता-जुलता लग सकता है (खासकर अगर थोड़ा पानी या प्रिजर्वेटिव मिला दिया जाए)।
कुछ कंपनियां मिक्स जूस बनाती हैं (करेला + एलोवेरा), लेकिन लेबल पर सिर्फ “करेला जूस” लिखकर या बड़े अक्षरों में करेला दिखाकर बेच देती हैं। इससे सस्ता पड़ता है और प्रॉफिट ज्यादा।
मार्केट में 90% से ज्यादा हर्बल जूस (एलोवेरा या करेला) पूरी तरह प्योर नहीं होते—इनमें पानी, प्रिजर्वेटिव, कलर या दूसरे सस्ते मटेरियल मिले होते हैं।
असली फर्क कैसे पहचानें?
विशेषता
असली करेला जूस
एलोवेरा जूस (या मिलावटी)
स्वाद
बहुत तेज कड़वा, मुंह में जलन जैसा
हल्का कड़वा-एसिडिक, जेली जैसा
रंग
हरा-पीला (करेले का प्राकृतिक)
लगभग साफ/हल्का पीला या सफेद
गाढ़ापन
पतला लेकिन करेले के कण हो सकते हैं
ज्यादा चिकना/जेल जैसा
गंध
सब्जी जैसी, तीखी
हल्की हर्बल या बिना गंध
सलाह:
घर पर बनाएं — सबसे सुरक्षित तरीका। ताजा करेला लें, धोकर जूस निकालें। स्वाद कम करने के लिए नींबू, अदरक या थोड़ा सेब मिला सकते हैं।
खरीदते समय — लेबल अच्छे से पढ़ें। “100% Pure Karela Juice” लिखा हो, FSSAI लाइसेंस नंबर चेक करें।知名 ब्रांड्स (जैसे Baidyanath, Dabur, Patanjali आदि) के मिक्स जूस में भी इंग्रीडिएंट्स लिस्ट देख लें।
डायबिटीज के लिए करेला बेहतर माना जाता है क्योंकि इसमें पॉलीपेप्टाइड-P जैसे कंपाउंड होते हैं जो इंसुलिन जैसा काम करते हैं। एलोवेरा पाचन और त्वचा के लिए ज्यादा अच्छा है।
ज्यादा मात्रा में किसी भी जूस को बिना डॉक्टर सलाह के न पिएं — दोनों के ज्यादा सेवन से पेट खराब हो सकता है या इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन हो सकता है।



