भारत में गौ रक्षा और गौशालाओं के लिए सरकारी अनुदान चंदे के नाम पर भ्रष्टाचार

गौ सेवा के नाम पर घोटाले के कई मामले सामने आए हैं। भारत में गौ-रक्षा और गौशालाओं (cow shelters) के लिए सरकारी अनुदान, सेस और चंदे के नाम पर भ्रष्टाचार की खबरें विभिन्न राज्यों से आती रहती हैं। ये मुख्य रूप से फर्जी बिलिंग, गैर-मौजूद गायों पर अनुदान लेना, और फंड का दुरुपयोग शामिल हैं।
प्रमुख उदाहरण:
राजस्थान (जैसलमेर, बाड़मेर आदि): जांच में 12 गौशालाओं में एक भी गोवंश नहीं मिला, फिर भी 6 संचालकों ने एक साल में 62 लाख रुपये का अनुदान उठा लिया। कुछ मामलों में 20 करोड़ तक का घोटाला बताया गया।

। CAG रिपोर्ट और विभागीय जांच में फर्जी टैगिंग और गबन पाया गया।
मध्य प्रदेश (गुना, मऊगंज): सरकारी गौशाला खाली पड़ी, लेकिन कागजों पर फर्जी बिल से फंड निकाला गया (प्रति गाय 40 रुपये के हिसाब से)। मऊगंज में गौवंश की फर्जी फीडिंग से करोड़ों का खेल।
उत्तर प्रदेश: गो सेवा सेस और योजनाओं में भ्रष्टाचार के आरोप। महोबा जैसी जगहों पर लापरवाही से गायों की मौत और फंड दुरुपयोग। विपक्ष ने पहले से ही “गाय के नाम पर घोटाला” की आशंका जताई थी।
छत्तीसगढ़ और अन्य: गौठानों में पैसा हड़पने, बदहाल स्थिति और फर्जी यात्राओं/प्रदर्शनों की खबरें।
सामान्य पैटर्न:
गौशालाएं कागजों पर चल रही, धरातल पर खाली या बेहद खराब हालत।
फर्जी गायों की संख्या दिखाकर अनुदान/चंदा वसूली।
कुछ NGO/संचालक सरकारी सब्सिडी, भूमि आवंटन और दान का दुरुपयोग करते पाए गए।
चंदा वसूली में फर्जी रसीदें या गैर-रजिस्टर्ड संस्थाएं।

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