आषाढ़ पूर्णिमा से शुरू होगा बौद्ध भिक्षुओं का वर्षावास | कुशीनगर के बौद्ध विहारों में तैयारियां अंतिम चरण में

कसया, कुशीनगर। आषाढ़ पूर्णिमा (29 जुलाई) से बौद्ध भिक्षुओं का तीन माह का वर्षावास प्रारंभ होगा। विश्व प्रसिद्ध बौद्ध तीर्थस्थल कुशीनगर स्थित विभिन्न देशों के बौद्ध विहारों और मठों में देश-विदेश से आने वाले भिक्षुओं के ठहरने और धार्मिक अनुष्ठानों की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। वर्षावास के दौरान भिक्षु एक ही स्थान पर रहकर साधना, ध्यान, धम्म अध्ययन और जनकल्याण के कार्यों में संलग्न रहेंगे।

भिक्षु संघ कुशीनगर के सचिव एवं श्रीलंका बुद्ध विहार के प्रमुख भंते डॉ. नन्द रतन ने बताया कि वर्षावास बौद्ध परंपरा का महत्वपूर्ण अंग है। इस दौरान भिक्षु भगवान बुद्ध के पंचशील, आर्य अष्टांगिक मार्ग तथा करुणा, मैत्री, अहिंसा और सदाचार के सिद्धांतों का पालन करते हुए धम्म का प्रचार-प्रसार करते हैं।

म्यांमार मंदिर के प्रमुख भिक्षु नंदका ने कहा कि बौद्ध धर्म में संस्कारों और अनुशासन का विशेष महत्व है। प्रत्येक व्यक्ति को ऐसे कार्य करने चाहिए जिससे समाज में सकारात्मक संदेश जाए तथा सभी प्राणियों के प्रति करुणा और दया का भाव बना रहे।

ज्ञानेश्वर बुद्ध विहार के प्रमुख भंते महेंद्र ने बताया कि भगवान बुद्ध का संदेश “अप्प दीपो भव” (स्वयं अपना दीपक बनो) आज भी उतना ही प्रासंगिक है। वर्षावास के दौरान भिक्षु इसी उपदेश का पालन करते हुए एक स्थान पर रहकर साधना और धम्म पालन करते हैं। थाई भिक्षु सोंन क्रान ने कहा कि वर्षावास के समय बौद्ध धर्म के सभी धार्मिक संस्कारों और अनुशासन का विशेष रूप से पालन किया जाता है।

भिक्षु धर्मकीर्ति बुद्ध विहार के प्रमुख भंते विमल कीर्ति ने बताया कि भगवान बुद्ध ने 527 ईसा पूर्व सारनाथ के ऋषिपत्तन (मृगदाय) में अपना पहला वर्षावास किया था। इसके बाद उन्होंने श्रावस्ती, जेतवन, वैशाली, राजगृह सहित विभिन्न स्थानों पर अपने जीवनकाल में कुल 45 वर्षावास किए।

भंते अशोक ने बताया कि वर्षावास के दौरान भिक्षुओं को विनय के नियमों का कठोरता से पालन करना होता है। कुशीनगर के म्यांमार बुद्ध विहार, तिब्बत मॉनेस्ट्री, थाई मॉनेस्ट्री, वियतनाम-चाइनीज बुद्धिस्ट मॉनेस्ट्री, कंबोडिया मंदिर, कोरिया मंदिर सहित विभिन्न देशों के विहारों में अनेक भिक्षु पहुंच चुके हैं, जबकि अन्य भिक्षुओं का आगमन अभी जारी है।

वर्षावास के प्रथम दिन बुधवार को भिक्षु बुद्ध पूजन, ध्यान और भिक्षाटन (पिंडपात) करेंगे। इस अवसर पर बुद्ध मार्ग स्थित लिंह सन वियतनामी चाइनीज बुद्धिस्ट मॉनेस्ट्री में वियतनाम की भिक्षुणी विशुद्धि द्वारा भिक्षु संघ को भोजन दान (संघदान) भी कराया जाएगा।

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