वाराणसी। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर वाराणसी केंद्रीय कारागार में भाई-बहन के प्रेम और भावनाओं का अनोखा संगम देखने को मिला। करीब 18 जिलों से बहनें अपने भाइयों से मिलने जेल पहुंचीं। लंबे समय बाद भाइयों से मुलाकात कर बहनों ने तिलक लगाया, कलाई पर राखी बांधी और उनके सुखद भविष्य की कामना की। इस दौरान कई बहनों की आंखें नम हो गईं।
बहनों ने कहा कि भाई उनके साथ हैं, लेकिन घर पर नहीं हैं। किसी न किसी मामले में सजा काट रहे भाइयों से रक्षाबंधन के दिन मिलना उनके लिए बेहद भावुक क्षण है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भाई अपनी सजा पूरी कर जल्द घर लौटेंगे और अगला रक्षाबंधन परिवार के साथ मनाएंगे।
चार समूहों में कराई गई मुलाकात
केंद्रीय कारागार के वरिष्ठ अधीक्षक राधा कृष्ण मिश्रा ने बताया कि रक्षाबंधन को देखते हुए जेल प्रशासन की ओर से विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। सुबह आठ बजे से महिला परिजनों की अपने भाइयों से मुलाकात कराई जा रही है। मुलाकात की व्यवस्था चार समूहों में की गई है। प्रत्येक समूह में करीब 75 से 80 महिला परिजन अपने भाइयों से मिल रही हैं। अब तक 300 से अधिक बंदियों की उनकी बहनों से मुलाकात हो चुकी है।
दूर-दराज से आने वाली बहनों के लिए इंतजाम
दूर-दराज के जिलों से आने वाली महिलाओं को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए केंद्रीय कारागार के बाहर टेंट, कुर्सी-मेज, मिष्ठान और जलपान की व्यवस्था की गई। सुरक्षा व्यवस्था के साथ ही मुलाकात की प्रक्रिया को सहज और सुविधाजनक बनाने पर विशेष जोर दिया गया।
बहनें नहीं पहुंचीं तो स्वयंसेवी संस्थाओं ने बांधी राखी
जिन बंदियों की बहनें किसी कारणवश जेल नहीं पहुंच सकीं, उनके लिए भी रक्षाबंधन का पर्व फीका न रहे, इसकी व्यवस्था की गई। जेल अधिकारियों के अनुसार स्वयंसेवी संस्थाओं और ब्रह्माकुमारी संस्था की बहनों की ओर से ऐसे बंदियों की कलाई पर राखी बांधी जाती है, ताकि उन्हें भी भाई-बहन के स्नेह और अपनत्व का एहसास हो सके।
रक्षाबंधन के दौरान जेल प्रशासन ने कर्मचारियों को महिला परिजनों के साथ नम्रता और सम्मानपूर्वक व्यवहार करने के निर्देश दिए। महिलाओं की गरिमा का विशेष ध्यान रखने और किसी भी महिला परिजन से कठोर शब्दों का प्रयोग नहीं करने को कहा गया।
केंद्रीय कारागार में रक्षाबंधन के दौरान भावुक कर देने वाला माहौल रहा। जेल की ऊंची दीवारें और लोहे की सलाखें भले ही भाइयों को परिवार से दूर रखती हों, लेकिन भाई-बहन के प्रेम की डोर को कमजोर नहीं कर सकीं। राखी के धागे ने एक बार फिर संदेश दिया कि रिश्तों का स्नेह हर दूरी और परिस्थिति से बड़ा होता है।



