
दिवाली हिंदू धर्म के सबसे प्रमुख त्योहारों में से एक है। पांच दिनों तक चलने वाले इस पर्व की शुरुआत धनतेरस से होती है और समापन भाई दूज के साथ होता है। इस दौरान छोटी दिवाली, बड़ी दिवाली और गोवर्धन पूजा समेत कई प्रमुख त्योहार मनाए जाते हैं। हालांकि, साल 2026 में छोटी और बड़ी दिवाली की तारीख को लेकर लोगों के बीच असमंजस बना हुआ है। इसकी वजह कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी और अमावस्या तिथियों का दो अलग-अलग दिनों में पड़ना है। ऐसे में सवाल है कि छोटी दिवाली 7 नवंबर को मनाई जाएगी या 8 नवंबर को? आइए जानते हैं पंचांग के अनुसार दोनों पर्वों की सही तारीख।
छोटी दिवाली 2026 कब है? (Choti Diwali 2026 Date)
पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर 2026, शनिवार को सुबह 10 बजकर 47 मिनट से शुरू होगी। इसका समापन 8 नवंबर 2026, रविवार को सुबह 11 बजकर 27 मिनट पर होगा। इसके बाद अमावस्या तिथि शुरू हो जाएगी।
हिंदू धर्म में छोटी दिवाली को नरक चतुर्दशी भी कहा जाता है। इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करने की विशेष परंपरा है, जिसे अभ्यंग स्नान कहते हैं। इस साल 8 नवंबर को सूर्योदय के समय चतुर्दशी तिथि रहने के कारण उदया तिथि के अनुसार छोटी दिवाली यानी नरक चतुर्दशी 8 नवंबर 2026, रविवार को मनाई जाएगी।
छोटी दिवाली पर क्यों किया जाता है अभ्यंग स्नान?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, छोटी दिवाली के दिन सूर्योदय से पहले शरीर पर तेल लगाकर स्नान करना बेहद शुभ माना जाता है। इसे अभ्यंग स्नान कहा जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से नकारात्मकता दूर होती है और व्यक्ति को नरक के भय से मुक्ति मिलती है।
पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने इसी दिन नरकासुर नामक राक्षस का वध किया था और उसके अत्याचारों से हजारों कन्याओं को मुक्त कराया था। भगवान श्रीकृष्ण की इस विजय की खुशी में नरक चतुर्दशी मनाई जाती है। इस दिन स्नान और पूजा-पाठ करने का विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है।
कब मनाई जाएगी बड़ी दिवाली 2026? (Diwali 2026 Date)
पंचांग के अनुसार, कार्तिक कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 8 नवंबर 2026, रविवार को सुबह 11 बजकर 27 मिनट से शुरू होगी। इसका समापन 9 नवंबर 2026, सोमवार को दोपहर 12 बजकर 31 मिनट पर होगा।
हालांकि, अमावस्या तिथि 9 नवंबर को भी सूर्योदय के समय रहेगी, लेकिन दिवाली पर प्रदोष काल में अमावस्या तिथि का होना विशेष महत्व रखता है। इसी वजह से लक्ष्मी पूजन का मुख्य पर्व 8 नवंबर 2026, रविवार को मनाया जाएगा।
दिवाली पर क्यों होती है मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा?
हिंदू धर्म में दिवाली को सुख, समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। इस दिन घरों की साफ-सफाई कर दीपक जलाए जाते हैं और रंगोली से घरों को सजाया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि दिवाली की रात माता लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और स्वच्छ एवं रोशनी से जगमगाते घरों में निवास करती हैं।
वहीं, भगवान गणेश को प्रथम पूजनीय और विघ्नहर्ता माना जाता है। इसी कारण दिवाली पर माता लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश की पूजा की जाती है। मान्यता है कि दोनों की विधि-विधान से पूजा करने पर घर में सुख-शांति, धन-धान्य और समृद्धि बनी रहती है।



