राजभाषा सप्ताह समारोह समाचार | ‘हिंदी की ताकत उसकी समावेशी प्रकृति में, जो भाषा विनम्र होगी वही मजबूत बनेगी’

राजभाषा सप्ताह समारोह में बोले व्योमेश शुक्ल—हिंदी ने देश को साझा पहचान दी, डिजिटल दौर में तेजी से बढ़ रहा भाषा का प्रभाव

वाराणसी। केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान, सारनाथ में राजभाषा कार्यान्वयन समिति की ओर से राजभाषा सप्ताह समारोह का शुभारंभ अतिश सभागार में हुआ। कार्यक्रम में हिंदी की व्यापकता, समावेशी स्वरूप और डिजिटल युग में बढ़ते प्रभाव पर वक्ताओं ने विचार रखे।

विशिष्ट अतिथि एवं नागरी प्रचारिणी सभा के प्रधानमंत्री व्योमेश शुक्ल ने कहा कि हिंदी एक समावेशी भाषा है, जिसमें विभिन्न विचारों और संस्कृतियों को समेट लेने की क्षमता है। उन्होंने कहा कि जो भाषा जितनी विनम्र और ग्रहणशील होगी, उतनी ही मजबूत बनेगी। हिंदी में यह सांस्कृतिक स्वभाव सदियों से रहा है। उन्होंने कहा कि अपनी परंपरा और ज्ञान-परंपरा से जुड़कर ही हिंदी ने अपने स्वरूप को समृद्ध किया है।

उन्होंने कहा कि भारतेंदु हरिश्चंद्र से लेकर महात्मा गांधी तक अनेक चिंतकों ने देश को एक सूत्र में जोड़ने के लिए जनभाषा की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने महात्मा गांधी के हिंदी संबंधी विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि हिंदी देश के विभिन्न हिस्सों के लोगों के बीच संवाद का माध्यम बनने की क्षमता रखती है।

मुख्य अतिथि आईएमएस, बीएचयू के निदेशक प्रो. एसएन गंगवार ने कहा कि इंटरनेट के दौर में हिंदी का विस्तार तेजी से हो रहा है। गूगल, यूट्यूब और व्हाट्सएप जैसे डिजिटल मंचों पर हिंदी सामग्री ने गांव और शहर तथा विभिन्न शैक्षिक पृष्ठभूमि के लोगों के बीच डिजिटल संवाद को आसान बनाया है।

अध्यक्षता करते हुए संस्थान के कुलपति प्रो. वांगचुक दोर्जे नेगी ने कहा कि अपनी भाषा से जितना प्रेम और जुड़ाव होगा, भाषा उतनी ही मजबूत होगी। भाषा केवल शब्दों का माध्यम नहीं, बल्कि भाव और पहचान की अभिव्यक्ति है। हिंदी ने भारत को केवल शब्द नहीं दिए, बल्कि साझा पहचान को भी मजबूत किया है।

विषय प्रवर्तन डॉ. उमेश प्रसाद सिंह ने किया। संचालन डॉ. अनुराग त्रिपाठी ने किया। स्वागत उपकुलसचिव डॉ. हिमांशु पाण्डेय तथा धन्यवाद ज्ञापन मीडिया प्रभारी डॉ. सुशील कुमार सिंह ने किया।

समारोह में प्रो. रामसुधार सिंह, राजेश मिश्र, सुनील कुमार, डॉ. रविरंजन द्विवेदी, टीआर शाशनी, डॉ. जम्पा सामतेन सहित संस्थान के अधिकारी, कर्मचारी और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

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