रामकोला कुशीनगर। मुख्य गंडक नहर पर परगन मठिया गांव के सामने फाटक के पास कुछ माह पहले बनाया गया स्पर पानी के दबाव में क्षतिग्रस्त हो गया। स्पर का हिस्सा टूटने की जानकारी मिलते ही सिंचाई विभाग ने नहर में पानी की आपूर्ति रोक दी और क्षतिग्रस्त हिस्से में मिट्टी भरने का काम शुरू करा दिया। भारी भरकम की लागत से तैयार संरचना के कुछ ही महीनों में क्षतिग्रस्त होने से निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
वाल्मीकिनगर बैराज से निकलकर कुशीनगर होते हुए बिहार में प्रवेश करने वाली मुख्य गंडक नहर जिले में सिंचाई का प्रमुख साधन है। इससे जुड़ी शाखा नहरों और माइनरों के माध्यम से बड़ी संख्या में किसानों के खेतों तक पानी पहुंचता है। नहर के फाटकों के आसपास पानी के दबाव को नियंत्रित करने और तटों की सुरक्षा के लिए स्पर समेत अन्य संरचनाओं का निर्माण कराया जाता है।
बताया जा रहा है कि इसी वर्ष परगन मठिया के सामने नहर के फाटक के दोनों तरफ स्पर का निर्माण कराया गया था। निर्माण कार्य मई तक चला था। अभी निर्माण को कुछ ही महीने हुए थे कि सितंबर में नहर में पानी का दबाव बढ़ने के बाद स्पर का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। इसके बाद स्थानीय लोगों में निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर चर्चा शुरू हो गई। स्पर के क्षतिग्रस्त होने के बाद सिंचाई विभाग ने नहर में पानी की आपूर्ति रोककर मरम्मत कार्य शुरू कराया है। टूटे हिस्से में मिट्टी डालकर उसे भरने का काम कराया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि समय रहते क्षतिग्रस्त हिस्से की जानकारी मिलने से स्थिति को बिगड़ने से रोक लिया गया। यदि पानी का दबाव लगातार बना रहता तो नहर की संरचना को और नुकसान पहुंचने की आशंका थी। स्थानीय लोगों ने स्पर निर्माण में इस्तेमाल सामग्री, तकनीक और कार्य की गुणवत्ता की जांच कराने की मांग की है।



