दो घंटे तक अस्पताल में बैठकर राज्यमंत्री देखते रहे हालात, ब्लड लेकर भटकते परिजन को देख भड़के सुरेश राही

मरीजों से कथित वसूली, इलाज में देरी और रेफरल व्यवस्था पर उठाए सवाल, डॉक्टरों को लगाई फटकार

सीतापुर। जिला अस्पताल में शुक्रवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब उत्तर प्रदेश सरकार के कारागार राज्य मंत्री सुरेश राही अचानक औचक निरीक्षण पर पहुंच गए। राज्यमंत्री ने किसी औपचारिक बैठक या प्रस्तुतीकरण के बजाय सीधे अस्पताल की वास्तविक स्थिति जानने का तरीका अपनाया और करीब दो घंटे तक एक कुर्सी पर बैठकर मरीजों, तीमारदारों और स्वास्थ्य सेवाओं की गतिविधियों पर नजर बनाए रखी।
निरीक्षण के दौरान राज्यमंत्री ने अस्पताल में आने वाले मरीजों और उनके परिजनों से सीधे बातचीत कर उपचार व्यवस्था की जानकारी ली। इस दौरान उन्हें इलाज में देरी, अव्यवस्थाओं और कर्मचारियों की कार्यशैली से जुड़ी कई शिकायतें सुनने को मिलीं। शिकायतों की पुष्टि होते ही मंत्री ने मौके पर मौजूद चिकित्सकों और अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई।
सबसे अधिक नाराजगी उस समय देखने को मिली जब एक व्यक्ति अपने भाई के लिए बाहर से करीब पांच हजार रुपये में ब्लड खरीदकर अस्पताल पहुंचा, लेकिन ब्लड उपलब्ध होने के बावजूद मरीज को समय से चढ़ाया नहीं जा रहा था। परिजनों का आरोप था कि वे करीब दो घंटे से ब्लड लेकर अस्पताल परिसर में भटक रहे हैं और कोई सुनवाई नहीं हो रही है। यह मामला सामने आते ही मंत्री सुरेश राही ने संबंधित चिकित्सकों को तलब कर जवाब मांगा और मरीजों के इलाज में लापरवाही पर कड़ी नाराजगी जताई।
निरीक्षण के दौरान राज्यमंत्री ने अस्पताल में मरीजों से कथित वसूली और निजी व्यक्तियों के माध्यम से धन लेने जैसी शिकायतों को भी गंभीरता से लिया। उन्होंने कहा कि यदि इलाज के नाम पर किसी मरीज का आर्थिक शोषण किया जा रहा है तो यह बेहद गंभीर मामला है और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
राज्यमंत्री ने जिला अस्पताल से बड़ी संख्या में मरीजों को लखनऊ रेफर किए जाने की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जनता को स्थानीय स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलनी चाहिए। लगातार रेफरल की शिकायतें इस बात का संकेत हैं कि व्यवस्था में कहीं न कहीं गंभीर खामियां मौजूद हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पैसे देने वालों को प्राथमिकता और गरीब मरीजों की अनदेखी जैसी बातें सामने आना स्वास्थ्य व्यवस्था की साख पर प्रश्नचिह्न लगाता है।
कारागार राज्य मंत्री ने मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) डॉ. इंद्र सिंह की कार्यप्रणाली पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि जब वरिष्ठ अधिकारी स्वयं इलाज के लिए बड़े शहरों का रुख करते हैं तो आम जनता का जिला अस्पताल पर विश्वास कमजोर पड़ता है। राज्यमंत्री सुरेश राही ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मरीजों के उपचार में लापरवाही, भ्रष्टाचार या किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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