
शराब पीकर गाड़ी चलाने वालों की अब मुश्किलें बढ़ सकती हैं। केरल हाईकोर्ट ने नशे में वाहन चलाने के मामलों में ड्राइविंग लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई को लेकर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने मोटर वाहन विभाग (MVD) की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि अधिकारी मोटर वाहन अधिनियम की धारा 19 के तहत मिली शक्तियों का पर्याप्त इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं। कोर्ट ने राज्य में लगातार हो रही जानलेवा सड़क दुर्घटनाओं को देखते हुए ऐसे मामलों में तत्काल और प्रभावी कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
जस्टिस कौसर एडप्पागाथ ने कहा कि अधिकारियों की अनिच्छा से कानून के उन प्रावधानों का प्रभाव कम हो रहा है, जिन्हें गलत व्यवहार रोकने और लोगों में कानून का डर बनाए रखने के लिए बनाया गया है।
शराब पीकर गाड़ी चलाने वालों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश
हाईकोर्ट ने कहा कि कानूनी प्रावधानों और अदालत के निर्देशों के बावजूद मोटर वाहन अधिनियम की धारा 19 के तहत ड्राइविंग लाइसेंस को अयोग्य घोषित करने या रद्द करने की शक्ति का इस्तेमाल बहुत कम किया जा रहा है।
अदालत के मुताबिक, शराब पीकर वाहन चलाने की घटनाओं में लगातार लोगों की जान जा रही है और कई परिवार प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में अधिकारियों को अपनी कानूनी शक्तियों का इस्तेमाल गंभीरता से करना चाहिए।
परिवहन आयुक्त को दिया ये निर्देश
अदालत ने केरल के परिवहन आयुक्त को निर्देश दिया है कि वह सुनिश्चित करें कि नशे में गाड़ी चलाने से जुड़े मामलों में मोटर वाहन अधिनियम की धारा 19 के तहत तुरंत और प्रभावी कार्रवाई हो।
कोर्ट ने कहा कि इस प्रावधान को सख्ती से लागू करने से लापरवाही बरतने वाले वाहन चालकों की जवाबदेही तय होगी। साथ ही सार्वजनिक सड़कों पर खतरनाक तरीके से वाहन चलाने वालों के लिए यह एक प्रभावी निवारक के रूप में काम करेगा।
किस मामले की सुनवाई के दौरान आया फैसला?
हाईकोर्ट ने यह निर्देश एक सड़क दुर्घटना से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान दिया। मामले में एक व्यक्ति पर शराब के नशे में कार चलाते हुए बाइक सवार को टक्कर मारने का आरोप था। हादसे में बाइक सवार गंभीर रूप से घायल हो गया था और बाद में उसकी मौत हो गई।
इस मामले में आरोपी को जमानत देते हुए अदालत ने जांच अधिकारी को निर्देश दिया कि वह आरोपी का ड्राइविंग लाइसेंस और संबंधित दस्तावेज तुरंत लाइसेंसिंग अथॉरिटी को भेजे, ताकि मोटर वाहन अधिनियम की धारा 19 के तहत कार्रवाई शुरू की जा सके।
कार्रवाई से पहले देना होगा पक्ष रखने का मौका
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि लाइसेंसिंग अथॉरिटी को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करते हुए कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई करनी होगी। यानी संबंधित व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर देना होगा।
अदालत के इस निर्देश के बाद शराब पीकर वाहन चलाने के मामलों में ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित या रद्द करने की कार्रवाई को लेकर केरल के अधिकारियों की जिम्मेदारी बढ़ गई है।



