
वाराणसी। ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी विवाद में सुप्रीम कोर्ट की पहल पर शुरू हुई मध्यस्थता प्रक्रिया के अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने के बाद अब सभी की निगाहें सर्वोच्च न्यायालय पर टिक गई हैं। हिंदू पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता सुभाष नंदन चतुर्वेदी ने कहा कि उन्हें पहले से ही इस बात की आशंका थी कि बातचीत के जरिए समाधान निकलना आसान नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि सदियों पुराने ऐतिहासिक, धार्मिक और कानूनी पहलुओं से जुड़े इस विवाद में पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी। अब मध्यस्थता की पूरी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को भेजी जाएगी और उसी के आधार पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
चतुर्वेदी ने कहा कि यदि मध्यस्थता सफल नहीं होती है तो उसके बाद फैसला करना पूरी तरह सुप्रीम कोर्ट का अधिकार है। न्यायालय रिपोर्ट का अध्ययन कर आगे की सुनवाई और आवश्यक आदेश तय करेगा।
हिंदू पक्ष के अधिवक्ता ने कहा कि उनका पक्ष लगातार यही मांग करता रहा है कि ज्ञानवापी परिसर में हिंदू श्रद्धालुओं को उनके धार्मिक अधिकारों के अनुरूप पूजा-अर्चना और दर्शन की अनुमति मिले। उन्होंने कहा कि इस संबंध में अंतिम निर्णय सर्वोच्च न्यायालय को ही करना है और सभी पक्ष न्यायालय के आदेश के प्रति बाध्य होंगे।
उन्होंने कहा कि अब अगली सुनवाई महत्वपूर्ण होगी। मध्यस्थता प्रक्रिया समाप्त होने के बाद मामला एक बार फिर न्यायिक प्रक्रिया के केंद्र में आ गया है और सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट के अगले कदम पर टिकी हैं



