नई दिल्ली| साउथ दिल्ली के जीके-1 में हुए बहुचर्चित नादिर शाह मर्डर के आरोपी विशाल वर्मा को कोर्ट ने 9 जून 2026 को जमानत दे दी थी। एक लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी रकम के एक जमानती पेश करने का ऑर्डर दिया था। आरोपी की फैमिली गरीब होने से जमानत का इंतजाम नहीं कर सकी, जिससे वह एक महीने से ज्यादा वक्त तक जेल में ही बंद रहा।
आरोपी के वकील ने कोर्ट में इसका हवाला दिया तो अदालत ने 11 जुलाई को जमानत राशि घटा कर 30 हजार कर दी स्पेशल सेल का दावा है कि सनसनीखेज हत्याकांड की साजिश जेल में बंद लॉरेंस बिश्नोई, हाशिम बाबा और उसकी पत्नी जोया खान ने रची थी। स्पेशल सेल ने इस हत्याकांड में 16 आरोपियों की गिरफ्तारी की, जिनमें से 7-8 को जमानत मिल चुकी है। इसी आधार पर विशाल वर्मा को भी 9 जून को पटियाला हाउस कोर्ट ने बेल दी थी। लेकिन एक लाख रुपये के जमानती का इंतजाम नहीं होने से वह जेल से बाहर नहीं आ सका।
वकील ने सुप्रीम कोर्ट के मोती राम बनाम मध्य प्रदेश राज्य (1978) और सतेंद्र कुमार अंतिल बनाम सीबीआई के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि जमानत की शर्ते व्यावहारिक और न्यायसंगत होनी चाहिए, न कि इतनी कठोर कि जमानत का आदेश ही निरर्थक हो जाए। कोर्ट ने कहा, आरोपी सिर्फ आर्थिक असमर्थता के कारण जमानत के बावजूद जेल में है। सुप्रीम कोर्ट कह चुका है कि जमानत का मकसद आरोपी की कोर्ट में उपस्थिति सुनिश्चित करना है, न कि गरीबी के कारण अनावश्यक कैद में रखना ।



