
कसया, कुशीनगर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के ऐतिहासिक शताब्दी वर्ष एवं विजयादशमी उत्सव के पावन अवसर पर सोमवार को कसया नगर में संघ द्वारा भव्य पथ संचलन निकाला गया। पूर्ण गणवेश में घोष दल की सुमधुर ध्वनि के साथ कदम से कदम मिलाते हुए स्वयंसेवक श्रीरामजानकी मठ परिसर से संचलित होकर नगर भ्रमण होते हुए गोल्डन रिसोर्ट पहुँचे। पूरे मार्ग में स्वयंसेवकों का अनुशासित कदमताल, सामूहिकता और राष्ट्रसमर्पण का भाव आकर्षण का केंद्र रहा। अतिथियों ने कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन से किया। मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, गोरक्ष प्रांत के प्रांत प्रचारक
मुख्य वक्ता रमेश जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज शक्ति आराधना का पावन पर्व है, शक्ति का संचयन संगठन में है और संगठन शक्ति राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में है।देशभक्ति ही संघशक्ति है। कृण्वन्तो विश्वमार्यम्, भारत का चरित्र एवं सनातन का सन्देश है।संस्कार, संस्कृति एवं संरक्षण का धोतक है। जंतर -मंतर पर इस देश को तोड़ने वाली सभी आसुरी शक्ति प्रयत्नशील है।ऐसे में इस देश के सम्पूर्ण सज्जन शक्ति को साथ आकर इस आसुरी शक्ति को प्रास्थ करना होगा। हमारे आदर्श प्रभु श्री राम है, राम की संस्कृति ही इस राष्ट्र की संस्कृति है।राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सौ वर्षों की यात्रा केवल किसी संगठन की यात्रा नहीं, बल्कि राष्ट्रजीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने, समाज को संगठित करने और व्यक्ति के भीतर राष्ट्रभाव जागृत करने की सतत साधना है। संघ का मूल उद्देश्य समाज में संगठन, अनुशासन, चरित्रनिर्माण और राष्ट्र के प्रति समर्पण का भाव विकसित करना है।राष्ट्र की उन्नति और उसकी स्थायी शक्ति के लिए समाज का संगठित, संस्कारित और आत्मविश्वास से परिपूर्ण होना आवश्यक है। व्यक्ति निर्माण ही राष्ट्र निर्माण का आधार है। रमेश ने कहा कि संघ के शताब्दी वर्ष का महत्व केवल अतीत की उपलब्धियों का स्मरण करना नहीं, बल्कि सौ वर्षों के अनुभवों से प्रेरणा लेकर भविष्य के लिए नए संकल्प धारण करना है। यह अवसर प्रत्येक स्वयंसेवक और समाज के प्रत्येक जागरूक नागरिक से आत्ममंथन करने का आह्वान करता है कि हम अपने जीवन, परिवार और सामाजिक व्यवहार में राष्ट्रहित को कितना स्थान देते हैं। राष्ट्र का परम वैभव तभी संभव है, जब समाज का प्रत्येक व्यक्ति अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक हो और राष्ट्रजीवन के प्रति अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करे।पूरी दुनिया में हिन्दू ही अपनी मातृभूमि को माँ मानता है। संघ का उद्देश्य पुरे हिन्दू समाज का जागरण करना है। स्वामी विवेकानंद जी ने कहा था “गर्व से कहो हम हिन्दू हैं”उसी भाव को लेकर संघ समाज एवं राष्ट्र का जनजागरण कर रहा है। त्याग की संस्कृति भगवान राम की संस्कृति हैं, राष्ट्र के लिए अपना सम्पूर्ण अर्पण करने की संस्कृति संघ की संस्कृति है।यह राष्ट्र शक्ति को पूजता है इसलिए शक्ति से सम्पन्न होना हर समस्या का समाधान है।हमारा देश चिरप्राचीन होकर अपनी नैतिक एवं आधात्मिक मूल्यों को लेकर पुरे विश्व का मार्गदर्शन करता रहा है।उन्होंने कहा कि विजयादशमी का पर्व शक्ति, साहस, धर्मनिष्ठा और विजय का प्रतीक है। यह पर्व हमें स्मरण कराता है कि समाज और राष्ट्र के सम्मुख आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए संगठन, आत्मबल और दृढ़ संकल्प आवश्यक हैं।
उन्होंने स्वयंसेवकों से आह्वान किया कि वे शाखा के माध्यम से अपने व्यक्तित्व का विकास करते हुए समाज के बीच सेवा, संस्कार और संगठन के कार्यों को निरंतर विस्तार दें। समाज में व्याप्त भेदभाव, परस्पर दूरी और सामाजिक चुनौतियों को दूर करने के लिए आत्मीयता, समरसता और सहयोग का वातावरण निर्मित करें। उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन सांस्कृतिक परंपरा, आध्यात्मिक चेतना और विविधता में एकता उसकी विशिष्ट पहचान है। इन मूल्यों के संरक्षण और संवर्धन के साथ आधुनिक चुनौतियों का सामना करने के लिए समाज को जागरूक, सक्षम और संगठित बनाना समय की आवश्यकता है। राष्ट्रभक्ति केवल भावना तक सीमित न रहे, बल्कि वह हमारे आचरण, कार्य और सामाजिक उत्तरदायित्व में भी दिखाई दे। प्रत्येक व्यक्ति के भीतर कर्तव्यबोध जागृत हो, प्रत्येक परिवार में संस्कारों का वातावरण बने और समाज में परस्पर विश्वास तथा सहयोग सुदृढ़ हो, इसी से भारत को परम वैभव की ओर अग्रसर करने का मार्ग प्रशस्त होगा।आज जब भारत अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है जैसे सांस्कृतिक आक्रमण, सामाजिक विघटन और राजनीतिक दबाव तब विजयादशमी का यह संदेश और भी प्रासंगिक हो जाता है। रावण की तरह आज भी असत्य और अधर्म के कई रूप समाज को कमजोर करना चाहते हैं। ऐसे में रामचंद्र की संगठित कपि सेना से प्रेरणा लेकर हमें भी संगठित समाज का निर्माण करना होगा। विजयादशमी का पर्व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लिए केवल ऐतिहासिक स्मृति नहीं, बल्कि संगठन और शक्ति का निरंतर स्रोत है। यह दिन संघ को उसकी जड़ों से जोड़ता है, स्वयंसेवकों को अनुशासन और राष्ट्रनिष्ठा का स्मरण कराता है और हिंदू समाज को आत्मविश्वास से भरे भविष्य की ओर अग्रसर करता है। पथ संचलन में जिला प्रचारक प्रवीण, नगर कार्यवाह रविंद्र, जिला संघचालक राम आश्रय, नगर संघचालक डॉ. मनोज जैन, जिला कार्यवाह देवेंद्र सिंह, संजीव सिंह, आलोक, मृत्युंजय जायसवाल, रजनीकांत मणि, सुधीर राव, संतोष सिंह, दुर्गेश राय, पयोदकांत, अनार बाबू, सुरेश गुप्ता समेत बड़ी संख्या में स्वयंसेवक शामिल रहे।



