
(न्यू दिल्ली) सुधीर शर्मा :“ऑर्गेनिक के नाम पर बाजार में जहर”। दुर्भाग्य से, भारत में यह समस्या काफी गंभीर और व्यापक है। कई रिपोर्ट्स, जांचों और समाचारों से पता चलता है कि “ऑर्गेनिक”, “जैविक” या “बायो” के नाम पर कई प्रोडक्ट्स में रासायनिक कीटनाशक, प्रतिबंधित केमिकल्स, सिंथेटिक खाद या मिलावट पाई जाती है। इससे न सिर्फ किसानों को नुकसान होता है, बल्कि उपभोक्ताओं की सेहत पर भी बुरा असर पड़ता है (कैंसर, हार्मोनल समस्या, किडनी आदि जोखिम बढ़ते हैं)।
मुख्य समस्याएं क्या हैं?
जैविक कीटनाशक/खाद में रासायनिक मिलावट
छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में कृषि विश्वविद्यालय की रिपोर्ट्स में खुलासा हुआ है कि बाजार में बिकने वाले कई “जैविक” कीटनाशकों और खादों में प्रतिबंधित खतरनाक केमिकल्स (जैसे सिंथेटिक पेस्टिसाइड्स) मिले हुए हैं। ये फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं और इंसानों के लिए जहर साबित होते हैं। बड़ी कंपनियां भी “बायो/ऑर्गेनिक” लेबल लगाकर ऐसे प्रोडक्ट बेच रही हैं।
फर्जी ऑर्गेनिक लेबलिंग और सर्टिफिकेशन
भारत में ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन प्रोसेस-बेस्ड है (यानी प्रोडक्शन प्रक्रिया चेक होती है, लैब टेस्ट जरूरी नहीं), जिसके कारण फर्जीवाड़ा आसान हो जाता है।
ऑर्गेनिक कपास (cotton) में बड़ा घोटाला सामने आया — 2025 में कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने दावा किया कि 2.1 लाख करोड़ रुपये का स्कैम हुआ, जहां नॉन-ऑर्गेनिक कपास को ऑर्गेनिक बताकर निर्यात किया गया। भारत से निर्यात होने वाले 80% ऑर्गेनिक कपास में फ्रॉड की बात अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में भी आई।
सब्जियां, फल, दूध उत्पादों में भी फर्जी ऑर्गेनिक ब्रांड्स आम हैं।
फल-सब्जियों में केमिकल का इस्तेमाल
कैल्शियम कार्बाइड से फल पकाना, ग्रोथ हॉर्मोन से सब्जियां बड़ी करना — ये सब “ऑर्गेनिक” के नाम पर भी छिपकर चलता है। कई बार बाजार में “ऑर्गेनिक” कहकर बेची जाने वाली चीजों में पेस्टिसाइड रेसिड्यू पाए जाते हैं।
अन्य घोटाले
पंजाब में “ऑर्गेनिक फार्मिंग” के नाम पर पोंजी स्कीम चली, जिसमें हजारों किसानों से करोड़ों ठगे गए।
तिरुपति लड्डू घी स्कैंडल में भी “ऑर्गेनिक डेयरी” के नाम पर सिंथेटिक घी (पाम ऑयल + केमिकल्स) सप्लाई हुआ।
कैसे बचें फर्जीवाड़े से?
सर्टिफिकेशन चेक करें — असली ऑर्गेनिक प्रोडक्ट पर ये लेबल होने चाहिए:
Jaivik Bharat या India Organic (NPOP/APEDA सर्टिफाइड) — सबसे भरोसेमंद।
इम्पोर्टेड हो तो USDA Organic या EU Organic।
सिर्फ “ऑर्गेनिक” लिखा होना काफी नहीं — QR कोड स्कैन करें या APEDA/Jaivik Bharat पोर्टल पर वैरिफाई करें।
ट्रस्टेड सोर्स से खरीदें — लोकल किसानों से सीधे, फार्मर्स मार्केट, या ज्ञात ऑर्गेनिक फार्म्स (जैसे जो खुद प्रमाणित हों)।
खुद उगाएं — जहां संभव हो, किचन गार्डन या छोटे स्तर पर नेचुरल फार्मिंग अपनाएं।
धोकर इस्तेमाल करें — सब्जियां/फल नमक या सिरके के पानी में भिगोकर अच्छे से धोएं।
ज्यादा सस्ता न लें — असली ऑर्गेनिक महंगा होता है; बहुत सस्ता मिले तो शक करें।
यह समस्या सिर्फ भारत में नहीं, बल्कि दुनिया में आम है, लेकिन यहां सर्टिफिकेशन की कमजोरी और लालच के कारण ज्यादा गंभीर है। सचेत रहें, जागरूकता फैलाएं — तभी असली ऑर्गेनिक को बढ़ावा मिलेगा और जहर बाजार से कम होगा।



