आजकल बच्चों पर इंटर नेट का नकारात्मक प्रभाव बहुत तेजी से पड़ रहा है- सुधीर शर्मा

न्यू दिल्ली आजकल बच्चों पर इंटरनेट (खासकर सोशल मीडिया, यूट्यूब, गेम्स आदि) का नकारात्मक प्रभाव बहुत तेजी से बढ़ रहा है। कई स्टडीज और रिपोर्ट्स (जैसे हाल की भारतीय सर्वे और न्यूरो-डेवलपमेंटल रिपोर्ट्स) से पता चलता है कि हर दूसरा भारतीय बच्चा गलत कंटेंट या साइबर बुलिंग का शिकार हो रहा है, जिससे उनके व्यवहार, मानसिक स्वास्थ्य और पढ़ाई पर बुरा असर पड़ रहा है।
इंटरनेट से बच्चों को होने वाले मुख्य नुकसान
आक्रामक और अधीर व्यवहार — हिंसक वीडियो/गेम्स देखने से बच्चे जल्दी गुस्सा करने लगते हैं, भावनाओं पर कंट्रोल कम होता है।
ध्यान की कमी और ADHD जैसे लक्षण — सोशल मीडिया के नोटिफिकेशन और शॉर्ट वीडियो से कंसंट्रेशन पावर घटती है, बच्चे बेचैन और उतावले हो जाते हैं।
डिप्रेशन, एंग्जायटी और अकेलापन — साइबर बुलिंग से हीन भावना, डर और आत्मविश्वास की कमी आती है।
नींद की कमी और शारीरिक समस्याएं — ज्यादा स्क्रीन टाइम से आंखों की समस्या, मोटापा, और शारीरिक गतिविधि कम होना।
गलत कंटेंट का एक्सपोजर — अश्लील, हिंसक या गलत जानकारी से नैतिक मूल्यों पर असर, जल्दी mature होने की कोशिश।
ऑनलाइन शिकारी और प्राइवेसी रिस्क — पर्सनल जानकारी शेयर करने से खतरा।
ये सब देखकर लगता है कि पूरी तरह “नेट से दूर” रखना ही एकमात्र रास्ता है, लेकिन आज के दौर में पूरी तरह दूर रखना मुश्किल भी है (स्कूल प्रोजेक्ट, ऑनलाइन क्लास आदि के लिए जरूरी होता है)। इसलिए बेहतर तरीका है संतुलित और सुरक्षित इस्तेमाल सिखाना।
बच्चों को सुरक्षित रखने के व्यावहारिक उपाय (भारतीय पैरेंट्स के लिए)
स्क्रीन टाइम लिमिट सेट करें — 5-8 साल: 1 घंटा से कम, 9-12 साल: 1-2 घंटे, टीनएजर्स: 2 घंटे से ज्यादा नहीं। फैमिली रूल बनाएं और खुद भी फॉलो करें (रोल मॉडल बनें)।
पैरेंटल कंट्रोल यूज करें — Google Family Link, YouTube Kids, Microsoft Family Safety, या Happinetz जैसे टूल्स से गलत कंटेंट ब्लॉक करें, ऐप्स लिमिट करें।
खुलकर बात करें — डराएं नहीं, बल्कि समझाएं कि ऑनलाइन क्या सही-गलत है। बच्चे से पूछें आज क्या देखा, कोई परेशानी तो नहीं। ट्रस्ट बनाएं ताकि वो आपको बताए।
प्राइवेसी सेटिंग्स चेक करें — बच्चे के अकाउंट प्राइवेट रखें, लोकेशन शेयर न करें, अजनबियों से बात न करें।
ऑफलाइन एक्टिविटी बढ़ाएं — खेलकूद, पढ़ाई, फैमिली टाइम, हॉबीज पर फोकस। डिजिटल डिटॉक्स डे रखें (हफ्ते में 1 दिन नेट-फ्री)।
समस्या होने पर मदद लें — अगर बच्चा बहुत चिड़चिड़ा हो रहा है या डिप्रेशन के लक्षण दिखें तो साइकोलॉजिस्ट या 9917483001 पर कॉल करें
इंटरनेट बुरा नहीं है, लेकिन बिना गाइडेंस के खतरनाक हो जाता है। थोड़ी सतर्कता और सही दिशा से बच्चे इसका अच्छा इस्तेमाल भी सीख सकते हैं (शिक्षा, क्रिएटिविटी के लिए)। अगर आपके बच्चे की उम्र या कोई स्पेसिफिक समस्या है, तो बताएं — और डिटेल में सलाह दे सकता हूँ। बच्चों का बचपन बचाना हमारी जिम्मेदारी है!

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