नई दिल्ली। भारत ने स्वच्छ और हरित परिवहन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाते हुए अपनी पहली स्वदेशी
हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन की शुरुआत की है। यह ट्रेन हरियाणा के जींद -सोनीपत रेलखंड पर संचालित की जा रही है। लगभग 89 किलोमीटर लंबे इस रेलमार्ग पर चलने वाली10 कोच की इस ट्रेन में एक साथ करीब 2600 यात्री सफर कर सकेंगे और इसकी अधिकतम गति 110 किलोमीटर प्रति घंटा है। इसमें 1200 किमी. हाइड्रोजन फ्यूल सेल प्रोपल्शन सिस्टम लगा है, जो बिजली की ओवरहेड लाइनों या डीजल पर निर्भर नहीं है। आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक पर आधारित यह ट्रेन पारंपरिक डीजल ईंधन पर निर्भर नहीं है। इसमें हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की रासायनिक प्रक्रिया से बिजली उत्पन्न होती है, जिससे ट्रेन संचालित होती है। इस प्रक्रिया के दौरान कार्बन उत्सर्जन या अन्य हानिकारक गैसें नहीं निकलती, बल्कि केवल जलवाष्प (पानी की भाप) उत्सर्जित होती है। इसी कारण इसे शून्य उत्सर्जन (जीरो एमिशन) वाली पर्यावरण अनुकूल तकनीक माना जाता है। हाइड्रोजन तकनीक पर आधारित यात्री ट्रेनों की शुरुआत सबसे पहले जर्मनी ने की थी। वर्ष 2018 में फ्रांस की कंपनी एल्सटाॅम द्वारा विकसित कोराडिया आईलिंट को सेवा में उतारा गया था। इसे दुनिया की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल यात्री ट्रेन माना जाता है, जिसने पर्यावरण अनुकूल रेल परिवहन की दिशा में नई संभावनाएं खोलीं। भारतीय रेलवे की यह पहल स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग, आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देने और टिकाऊ परिवहन व्यवस्था

विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। भारत हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन शुरू करने वाला पांचवां देश (जर्मनी, फ्रांस, स्वीडन और चीन के बाद ) बन गया है। इससे भविष्य में पर्यावरण अनुकूल रेल सेवाओं के विस्तार को भी गति मिलने की उम्मीद है।



