मनुष्य को जीवन जीने की कला सिखाता है योग – आचार्य तीर्थवेदना नंद अवधूत

आनंद मार्ग प्रचारक संघ कुशीनगर का तीन दिवसीय सेमिनार सम्पन्न

कसया, कुशीनगर। आनंद मार्ग प्रचारक संघ कुशीनगर द्वारा आयोजित 17 जुलाई से 19 जुलाई तक आयोजित तीन दिवसीय सेमिनार में वक्ताओं ने सुखमय जीवन और मुक्ति का मार्ग बताया।

हिमाचल प्रदेश के कुल्लू मनाली जिला से पधारे वरिष्ठ आचार्य तीर्थवेदना नंद अवधूत ने कसया नगर स्थित प्रोग्रेसिव कंप्यूटर कुशीनगर के परिसर में सेमिनार के

समापन अवसर पर रविवार को कहा कि योग मनुष्य को जीवन जीने की कला सिखाता है।

आचार्य ने कहा कि योग मानव के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक उन्नति में सहायक है। योग के नियमित अभ्यास से मन में मानसिक शांति, आत्मविश्वास, एकाग्रता, स्मरण शक्ति, सकारात्मक सोच और स्वयं में निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है।

अवधूत ने बताया कि योग केवल आसन मात्र नहीं है। इसमें यम, नियम, प्राणायाम, धारणा, ध्यान और समाधि जैसे तत्व शामिल हैं। योग का शाब्दिक अर्थ है “संयोग” – जीवात्मा और परमात्मा का मिलन। जैसे चीनी और पानी मिलने से शरबत बनता है वैसे ही योग में जीव और शिव एक हो जाते हैं। श्रद्धालु सुशांत कुमार राव ने सभी संतों और श्रद्धालुओं का स्वागत करते हुए आभार व्यक्त किया।

इस दौरान प्रमुख रूप से आचार्य उत्पलानंद अवधूत, आचार्य रूद्र शिवानंद अवधूत, संतोष कुमार, बलराम, रविन्द्र, राकेश तिवारी, बलराम आदि सहित श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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