राष्ट्रीय सीपीआर दिवस पर बीएचयू में जीवनरक्षक कौशल प्रशिक्षण आयोजित

लगभग 150 प्रतिभागियों को सीपीआर एवं आपातकालीन जीवनरक्षक तकनीकों का दिया गया प्रशिक्षण

वाराणसी। राष्ट्रीय सीपीआर दिवस के अवसर पर काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के प्रॉक्टोरियल बोर्ड एवं चिकित्सा विज्ञान संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को न्यू लेक्चर थिएटर कॉम्प्लेक्स के कॉन्फ्रेंस हॉल में ‘जीवनरक्षक कौशल’ प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को उच्च गुणवत्ता वाली सीपीआर  एवं अन्य आपातकालीन जीवनरक्षक तकनीकों का प्रशिक्षण देकर अभियान को गति प्रदान करना था।

यह अभिनव पहल काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी की परिकल्पना का परिणाम है। उनके मार्गदर्शन एवं प्रेरणा से विश्वविद्यालय परिसर में जीवनरक्षक कौशल के व्यापक प्रशिक्षण का अभियान निरंतर संचालित किया जा रहा है।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रॉक्टोरियल बोर्ड के लगभग 35 सुरक्षा कर्मियों, आईएमएस-बीएचयू के अंतिम वर्ष के लगभग 100 एमबीबीएस विद्यार्थियों तथा फिजियोथेरेपी के 15 विद्यार्थियों सहित कुल लगभग 150 प्रतिभागियों ने भाग लिया। इनमें लगभग 35 महिला प्रतिभागियों की भी सक्रिय सहभागिता रही।

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को हृदयाघात, स्ट्रोक, बेहोशी, अत्यधिक रक्तस्राव, सड़क दुर्घटनाओं, श्वासावरोध तथा अन्य चिकित्सकीय आपात स्थितियों की पहचान एवं उनके प्रारम्भिक प्रबंधन के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। इसके साथ ही उच्च गुणवत्ता वाली सीपीआर , एयरवे प्रबंधन, रिकवरी पोजीशन तथा अन्य जीवनरक्षक तकनीकों का आधुनिक प्रशिक्षण मॉडल पर व्यावहारिक अभ्यास भी कराया गया।

प्रशिक्षण सत्र में जनरल सर्जरी विभाग के प्रो. डॉ. शशि प्रकाश मिश्रा, एनेस्थीसिया विभाग की प्रो. डॉ. मंजरी मिश्रा तथा जनरल सर्जरी विभाग के सहायक आचार्य एवं एसएसएच एवं आईएमएस-बीएचयू के प्रॉक्टर डॉ. प्रखर जायसवाल ने विशेषज्ञ प्रशिक्षक के रूप में प्रतिभागियों को प्रशिक्षण प्रदान किया।

इस अवसर पर आईएमएस-बीएचयू के निदेशक प्रो. (डॉ.) एस. एन. शंखवार ने कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई। उन्होंने प्रशिक्षकों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि समय पर एवं सही ढंग से दी गई सीपीआर अनेक बहुमूल्य जीवन बचा सकती है। उन्होंने प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे आज अर्जित ज्ञान एवं कौशल का उपयोग आवश्यकता पड़ने पर समाज सेवा एवं मानव जीवन की रक्षा के लिए करें।

कार्यक्रम के सफल आयोजन में चिकित्सा संकाय के अधिष्ठाता प्रो. संजय गुप्ता, सर सुन्दरलाल चिकित्सालय के चिकित्सा अधीक्षक प्रो. पुनीत तथा ट्रॉमा सेंटर के प्रोफेसर इंचार्ज प्रो. अजीत सिंह का विशेष मार्गदर्शन एवं सहयोग प्राप्त हुआ। उनके सहयोग से यह प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रभावी एवं सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

विशेषज्ञों ने बताया कि किसी भी हृदयाघात की स्थिति में शुरुआती कुछ मिनट अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। यदि आसपास उपस्थित व्यक्ति सही तकनीक से सीपीआर देना जानता हो, तो रोगी के जीवित बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। इसी उद्देश्य से बीएचयू में विभिन्न वर्गों के लोगों को नियमित रूप से जीवनरक्षक कौशल का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

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