समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि छात्रों और नौजवानों के आंदोलन के दबाव में भाजपा सरकार को पीछे हटना पड़ा। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री को बचाने के लिए केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया और उनके पद छोड़ने के बाद भाजपा सांसदों ने राहत की सांस ली।
गुरुवार को बदायूं के एक दिवसीय दौरे पर मीडिया से बातचीत करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि विपक्ष की मांग है कि दिल्ली में छात्रों और युवाओं के साथ हुई घटनाओं पर सरकार संसद में अपना पक्ष रखे। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया, पैलेट गन का इस्तेमाल हुआ और कील लगी लाठियों से हमला किया गया। उनका कहना था कि छात्रों को यह पता है कि उन पर कार्रवाई किसने की, लेकिन कार्रवाई करने वालों को भी यह नहीं मालूम कि आदेश किस स्तर से मिला था। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने छात्रों के साथ अत्याचार किया।
अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा लोकतांत्रिक मूल्यों का पालन नहीं करती। उनके अनुसार छात्रों पर लाठी और गोली चलाना, उन्हें घायल करना तथा छात्राओं के साथ दुर्व्यवहार जैसी घटनाएं गंभीर और निंदनीय हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नकारात्मक राजनीति करती है और छात्रों-नौजवानों के प्रति उसकी नीयत साफ नहीं है।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद 20 से अधिक पेपर लीक की घटनाएं हुई हैं, जिससे शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था प्रभावित हुई है। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि राज्य में 26 हजार से अधिक स्कूल बंद कर दिए गए हैं। उनका कहना था कि स्कूलों के बंद होने के साथ-साथ लाखों नौकरियां भी समाप्त हुईं, जिससे गरीब वर्ग के युवाओं की शिक्षा और रोजगार के अवसर प्रभावित हुए हैं।
सपा अध्यक्ष ने यह भी कहा कि भाजपा के लोग संत शिरोमणि रविदास के विचारों का पालन नहीं करते। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा संत रविदास और बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों को स्वीकार नहीं करती और उनके सिद्धांतों पर अमल नहीं करती।
बदायूं प्रवास के दौरान अखिलेश यादव ने पूर्व मंत्री ओमकार सिंह यादव के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने उनके आवास पहुंचकर परिजनों से मुलाकात की और अपनी संवेदनाएं प्रकट कीं। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि ओमकार सिंह यादव ने संघर्ष के बल पर राजनीति में अपनी पहचान बनाई और समाजवादी विचारधारा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि वह नेताजी के विश्वस्त सहयोगियों में रहे और हमेशा आम लोगों के सुख-दुख में सहभागी बने रहे, इसलिए कठिन परिस्थितियों में भी जनता का उन्हें लगातार समर्थन मिलता रहा।



