योग गुरु बाबा रामदेव ने स्वतंत्रता दिवस पर सरकार को चेतावनी दी थी कि युवाओं का आंदोलन फिर से तेज हो सकता है। हालांकि सोमवार को उनके सुर बदल गए। उन्होंने सोमवार को बच्चों को आंदोलन में घसीटने को अनुचित बताया। उन्होंने युवाओं के आंदोलन में अराजगता को भी गलत बताया। उन्होंने कहा कि आंदोलन लोकतंत्र के दायरे में शांतिपूर्वक होना चाहिए।
बाबा रामदेव ने कहा कि, ‘देश में न हिंदू खतरे में है, न मुसलमान, न ईसाई, न बौद्ध, न ब्राह्मण, न क्षत्रिय, न वैश्य, न शूद्र, न दलित, न आदिवासी, न वनवासी, न एससी-एसटी। खतरे में है देश का बचपन, देश की जवानी, देश का वर्तमान और देश का भविष्य, देश का प्रकृति, देश की संस्कृति, सभ्यता, देश का अखंडता और संप्रभुता। मैं इस समय देश का यदि कोई सबसे बड़ा मुद्दा मानता हूं तो ये कि देश का बचपन कैसे बचे।’
उन्होंने कहा कि, ‘कुछ लोग देश के बचपन का इस्तेमाल आंदोलन में कर रहे हैं। यदि देश का बच्चा, जो अभी प्राइमरी स्कूल में पढ़ रहा है, आप उसको आंदोलन में धकेल देंगे तो बच्चा पढ़ेगा कब? उसको पता ही नहीं है कि आंदोलन क्या होता है। आपने उसको फूंक मार दी, कि जा, तू भी जाकर थाने का घेराव कर ले। तू भी सड़क पर उतर जा, एडीएम और डीएम का घेराव कर ले। छोटे बच्चों को आंदोलनों में नहीं धकेलना चाहिए, पूरी दुनिया में कहीं नहीं। यह अभिभावकों का उत्तरदायित्व है बच्चों के लिए। बच्चे जब एडल्ट हो जाते हैं तब उनको अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना चाहिए और अपने कर्तव्यों के पालन के लिए प्रतिबद्धता उनमें बढ़नी चाहिए।’



