
दिल्ली-एनसीआर में पटाखों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद बाजारों में सभी तरह के पटाखों की बिक्री जारी होने की खबरों पर अदालत ने चिंता जताई है। कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार से तत्काल ध्यान देने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि उसने दिल्ली-एनसीआर में केवल लाइसेंस प्राप्त ग्रीन पटाखों को ही अनुमति दी है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट में सामने आया है कि बाजार में प्रतिबंधित और बिना लाइसेंस वाले पटाखे भी खुलेआम उपलब्ध हैं।
अदालत ने ग्रीन पटाखों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए उनके पैकेट पर क्यूआर कोड छापने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद बाजार में क्यूआर कोड वाले और बिना क्यूआर कोड वाले, दोनों तरह के पटाखे बिकने की खबरों पर कोर्ट ने सवाल उठाए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से क्या कहा?
सुनवाई के दौरान जस्टिस एमएम सुंदरेश ने केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) ऐश्वर्या भाटी से मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि एक तस्वीर प्रकाशित हुई है, जिसमें दिखाया गया है कि अदालत के पिछले दिन के आदेश के बावजूद दुकानों पर हर तरह के पटाखे उपलब्ध हैं।
जस्टिस सुंदरेश ने कहा कि रिपोर्ट के मुताबिक बाजार में लाइसेंस वाले और बिना लाइसेंस वाले, क्यूआर कोड वाले और बिना क्यूआर कोड वाले सभी तरह के पटाखे मिल रहे हैं। अदालत ने सरकार से इस मामले पर तत्काल ध्यान देने को कहा।
सुप्रीम कोर्ट ने ग्रीन पटाखे चलाने की दी थी अनुमति
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार, 2 नवंबर को दिल्ली-एनसीआर में सीमित समय के लिए ग्रीन पटाखे चलाने की अनुमति दी थी। अदालत ने कहा था कि दीपावली का धार्मिक, सामाजिक और भावनात्मक महत्व है, लेकिन पर्यावरण को नुकसान पहुंचाना त्योहार के मूल उद्देश्य के विपरीत है।
कोर्ट ने ग्रीन पटाखों के निर्माण, बिक्री और इस्तेमाल को नियंत्रित करने पर जोर दिया था। अदालत के मुताबिक, केवल लाइसेंस प्राप्त ग्रीन पटाखों को ही अनुमति दी गई है।
कब और कितनी देर तक जला सकेंगे पटाखे?
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक, दिल्ली-एनसीआर में 7 और 8 नवंबर को ही निर्धारित समय पर पटाखे जलाने की अनुमति होगी।
- सुबह: 6 बजे से 7 बजे तक
- रात: 8 बजे से 10 बजे तक
इसके अलावा अस्पतालों, नर्सिंग होम, स्कूलों, वृद्धाश्रमों और साइलेंस जोन के 300 मीटर के दायरे में पटाखे जलाने पर रोक रहेगी।
9 नवंबर से पटाखों की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध
अदालत के निर्देश के मुताबिक, 9 नवंबर से पटाखों की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लागू हो जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी माना था कि पटाखों से प्रदूषण होता है और प्रतिबंध के बावजूद पारंपरिक पटाखों की अवैध बिक्री जारी रहने की समस्या बनी हुई है।
कोर्ट ने पूर्ण प्रतिबंध के बजाय ग्रीन पटाखों के निर्माण, बिक्री और इस्तेमाल को नियंत्रित करने के विकल्प पर जोर दिया था। अब बाजार में सभी तरह के पटाखे उपलब्ध होने की रिपोर्ट के बाद अदालत ने सरकार को नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए ध्यान देने को कहा है।



