
दिल्ली में जुलाई और अक्टूबर के दौरान हुए विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में तीखी बहस देखने को मिली। सुनवाई में प्रदर्शन के अधिकार, कारोबारियों को होने वाले नुकसान और प्रदर्शनकारियों की तस्वीरें व वीडियो रिकॉर्ड करने जैसे मुद्दे उठे। इस दौरान चीफ जस्टिस ने बार-बार बीच में बोल रहे याचिकाकर्ता पक्ष के एक वकील को फटकार भी लगाई।
व्यापारियों ने कोर्ट में उठाया नुकसान का मुद्दा
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि मामले के सभी पहलुओं पर अलग-अलग जवाब तैयार कर लिया गया है और उसे दाखिल किया जा रहा है।
वहीं, वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने व्यापारिक संगठनों की ओर से पक्ष रखते हुए कहा कि विरोध प्रदर्शनों के कारण कारोबारियों को भारी नुकसान हो रहा है। उन्होंने बताया कि रामलीला मैदान के आसपास थोक बाजार हैं, जहां लाखों लोगों को रोजगार मिलता है। रोहतगी ने कोर्ट से इस मामले में कोई कदम उठाने की अपील की।
प्रदर्शन के अधिकार पर भी हुई बहस
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि विरोध प्रदर्शन करना मौलिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि जिस जगह को भी प्रदर्शन स्थल बनाया जाएगा, वहां कोई न कोई व्यापारिक गतिविधि जरूर होगी। ऐसे में कारोबार होने को प्रदर्शन रोकने का आधार नहीं बनाया जा सकता।
इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि जुलाई में एक दिन की अनुमति लेकर प्रदर्शनकारी 17 दिनों तक बैठे रहे और इसके बाद संसद मार्च का आह्वान कर दिया गया।
प्रदर्शनकारियों की तस्वीरें लेने पर निजता का सवाल
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने प्रदर्शन के दौरान पुलिस की ओर से लोगों की तस्वीरें और वीडियो कैप्चर किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर भी नोटिस जारी करने की मांग की। उन्होंने इसे निजता का उल्लंघन बताया।
इस पर सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि सार्वजनिक जगह पर प्रदर्शन करने वाले लोग निजता का हवाला दे रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि इस तर्क के आधार पर तो सीसीटीवी कैमरे बंद करने की मांग भी की जा सकती है।
हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस मामले में सवाल फेशियल रिकॉग्निशन टेक्नोलॉजी यानी चेहरे की पहचान करने वाली तकनीक के इस्तेमाल को लेकर है।
वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी ने इस पर कहा कि संबंधित याचिका पर पहले ही नोटिस जारी हो चुका है। सॉलिसिटर जनरल ने जवाब में कहा कि सरकार ने अपने जवाब में स्पष्ट किया है कि केवल कैप्चर की गई तस्वीरों के आधार पर किसी व्यक्ति की पहचान करके मुकदमा दर्ज नहीं किया जाता।
चीफ जस्टिस ने वकील को लगाई फटकार
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पक्ष के एक वकील बार-बार बीच में बोल रहे थे। इस पर चीफ जस्टिस ने उन्हें फटकार लगाते हुए कहा, ‘क्या कोर्ट को मछली बाजार समझ रखा है? इस तरह का आचरण नहीं चल सकता।’
चीफ जस्टिस ने याचिकाकर्ताओं से एक जैसी और मिलती-जुलती याचिकाएं दाखिल नहीं करने को भी कहा। उन्होंने कहा कि इस तरह की याचिकाओं से सुनवाई में मुश्किल होती है।



