
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। प्रदेश की सभी 403 सीटों पर जीत का लक्ष्य लेकर चल रही बीजेपी का खास फोकस पूर्वांचल पर है। पूर्वांचल की 133 विधानसभा सीटें पार्टी के लिए काफी अहम मानी जा रही हैं। इनमें करीब 50 सीटें ऐसी हैं, जहां बीजेपी को कड़ी चुनौती मिल सकती है। वहीं, लगभग 25 सीटें ऐसी बताई जा रही हैं, जिन पर पार्टी 2012 के बाद से जीत दर्ज नहीं कर पाई है।
इन मुश्किल सीटों पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए बीजेपी ने खास रणनीति तैयार की है। इसके तहत पड़ोसी राज्य बिहार के करीब 250 नेताओं को पूर्वांचल में चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी देने की तैयारी है। इनमें सांसद, विधायक और संगठन से जुड़े अन्य नेता शामिल होंगे। पार्टी की योजना है कि बिहार के नेताओं के जरिए पूर्वांचल के सामाजिक और जातीय समीकरणों को साधा जाए।
पूर्वांचल की 133 सीटों पर बीजेपी की नजर
पूर्वांचल में 28 जिले और करीब 133 विधानसभा सीटें हैं। इनमें आजमगढ़, अंबेडकर नगर, गाजीपुर, जौनपुर, मऊ, बलिया, चंदौली और भदोही जैसे जिले शामिल हैं। बीजेपी के लिए इन इलाकों में अपनी स्थिति मजबूत करना बड़ी चुनौती है।
आंकड़ों के मुताबिक, 2022 के विधानसभा चुनाव में आजमगढ़ की सभी 10 सीटों पर समाजवादी पार्टी ने जीत दर्ज की थी। 2012 में भी जिले की 10 में से 9 सीटें सपा के खाते में गई थीं। इसके अलावा अंबेडकर नगर की तीन, गाजीपुर की तीन और जौनपुर की चार सीटें भी बीजेपी के लिए चुनौती बनी हुई हैं।
मऊ सदर, बलिया की रसड़ा, चंदौली की सकलडीहा और भदोही की ज्ञानपुर सीट भी उन विधानसभा क्षेत्रों में शामिल हैं, जहां पार्टी लंबे समय से जीत हासिल नहीं कर सकी है।
बिहार के 250 नेताओं को मिलेगी जिम्मेदारी
पूर्वांचल में चुनावी जमीन मजबूत करने के लिए बीजेपी बिहार के करीब 250 नेताओं को मैदान में उतारने की तैयारी कर रही है। इन नेताओं को प्रखंड और मंडल स्तर पर लोगों से संपर्क करने के साथ स्थानीय संगठन के साथ तालमेल बनाने की जिम्मेदारी दी जाएगी।
बिहार के मंत्री रामकृपाल यादव के मुताबिक, नेताओं को पूर्वांचल के प्रखंड स्तर पर लोगों से संपर्क करने के लिए कहा गया है। बिहार संगठन के नेताओं को हर मंडल में तीन से चार बूथों के क्लस्टर की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है।
दरअसल, उत्तर प्रदेश और बिहार के सीमावर्ती इलाकों में भाषा, संस्कृति, रोजगार और सामाजिक रिश्तों की काफी समानता है। दोनों राज्यों के लोगों के बीच शादी-विवाह और पारिवारिक संबंध भी हैं। ऐसे में बीजेपी को उम्मीद है कि बिहार के नेताओं की स्थानीय सामाजिक और जातीय समीकरणों की समझ पूर्वांचल में पार्टी के लिए मददगार साबित हो सकती है।
तीन स्तरों पर चलेगा बीजेपी का चुनावी अभियान
बीजेपी ने यूपी विधानसभा चुनाव के लिए अपने प्रचार अभियान को तीन स्तरों में बांटने की तैयारी की है। पहले स्तर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जैसे बड़े नेता जनसभाएं करेंगे।
दूसरे स्तर पर केंद्रीय मंत्री और प्रदेश के वरिष्ठ नेता रैली और रोड शो के जरिए प्रचार करेंगे। वहीं, तीसरे स्तर पर अलग-अलग राज्यों के नेताओं को क्षेत्र के हिसाब से जिम्मेदारी दी जाएगी। पूर्वांचल में बिहार, दक्षिणी उत्तर प्रदेश में मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़, जबकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दिल्ली और हरियाणा के नेता चुनाव प्रचार करेंगे।
RJD ने बीजेपी की रणनीति पर कसा तंज
बीजेपी की इस रणनीति पर बिहार की विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने निशाना साधा है। पार्टी के प्रवक्ता एजाज अहमद ने तंज कसते हुए कहा कि जो नेता अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष की बांकीपुर सीट नहीं बचा पाए, वे उत्तर प्रदेश की सीटें क्या बचाएंगे।
फिलहाल बीजेपी पूर्वांचल की चुनौतीपूर्ण सीटों पर संगठन को मजबूत करने और स्थानीय समीकरणों को साधने में जुटी है। अब देखना होगा कि बिहार के नेताओं को मैदान में उतारने की यह रणनीति 2027 के विधानसभा चुनाव में पार्टी के लिए कितनी उपयोगी साबित होती है।



