
(नई दिल्ली) सुधीर शर्मा। भारत में पशुओं (जानवरों) के लिए नकली कैल्शियम और अन्य नकली पशु दवाइयों (veterinary medicines) का कारोबार काफी गंभीर समस्या बन चुका है। यह मुख्य रूप से दूधारू मवेशियों (गाय, भैंस) के लिए इस्तेमाल होने वाले कैल्शियम सप्लीमेंट्स, टॉनिक और अन्य दवाओं में देखा जा रहा है।
हाल की कुछ बड़ी घटनाएं और खबरें:
मध्य प्रदेश (बालाघाट): 2024 में खबर आई कि कैल्शियम के नाम पर नकली दवाएं बेची जा रही हैं। UP और बिहार से आए लोग गांव-गांव में 70 रुपये की सस्ती नकली दवा को 500 रुपये में बेच रहे थे। इससे मवेशियों की बीमारियां बढ़ीं और कुछ मामलों में मौतें भी हुईं।
उत्तर प्रदेश (आगरा): नवंबर 2024 में पुलिस ने भाई-जेठ की फैक्टरियों में पशुओं की नकली दवाएं बनाने का भंडाफोड़ किया। कच्चा माल मुंबई-दिल्ली से लाया जा रहा था, और हिमाचल-उत्तराखंड से पैकेजिंग। ये दवाएं कई गुना महंगे दामों पर बेची जा रही थीं।
सामान्य ट्रेंड: कई जगहों पर पशु दवाओं की फैक्टरियां पकड़ी गईं, जहां टैल्कम पाउडर, स्टार्च, मैग्नीशियम जैसी सस्ती चीजों से नकली एंटीबायोटिक्स और सप्लीमेंट्स बनाए जा रहे थे। कुछ मामलों में ये veterinary लैब्स में ही बनकर मानव दवाओं तक पहुंच गईं (जैसे हरिद्वार की एक लैब से नकली एंटीबायोटिक्स सरकारी अस्पतालों में पहुंचे)।
अन्य राज्यों में भी (जैसे गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तराखंड) ऐसे रैकेट पकड़े गए जहां कैल्शियम कार्बोनेट जैसी साधारण चीज को एंटीबायोटिक्स या हाई-प्राइस veterinary दवाओं के रूप में पैक किया जाता है।
नकली दवाओं के खतरे:
पशु को असली कैल्शियम नहीं मिलता → दूध बुखार (milk fever), हड्डियां कमजोर होना, प्रजनन समस्याएं, दूध कम होना।
जहरीले या बेकार मिश्रण से बीमारियां बढ़ना, मौत तक।
किसानों को आर्थिक नुकसान, क्योंकि महंगे दाम चुकाकर बेकार प्रोडक्ट मिलता है।
कैसे बचें?
हमेशा प्रमाणित veterinary डॉक्टर या विश्वसनीय कंपनी से सलाह लें अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें 9917483001
पैकेजिंग पर लाइसेंस नंबर, बैच नंबर, ** expiry date** और होलोग्राम चेक करें।
बहुत सस्ती या घूम-फिर कर बेचने वाले से बचें।
संदेह हो तो स्थानीय पशु चिकित्सा विभाग या ड्रग इंस्पेक्टर से जांच करवाएं।
असली प्रोडक्ट की पहचान के लिए कंपनी के आधिकारिक ऐप/वेबसाइट पर बैच चेक करें (कई कंपनियां QR कोड देती हैं)।



