भाजपा सरकार छात्रों, युवाओं और किसानों के लिए सबसे बड़ा संकट: अखिलेश यादव

अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा चोरी, छात्र आंदोलन और खाद संकट को लेकर संसद परिसर में सरकार पर साधा निशाना

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वर्तमान सरकार छात्रों, युवाओं और किसानों के लिए सबसे बड़ा संकट बन चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि जो सरकार अयोध्या स्थित प्रभु श्रीराम मंदिर के दान पात्र की सुरक्षा नहीं कर सकी, उससे पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगाने की उम्मीद भी नहीं की जा सकती। उनका कहना था कि सरकार ने करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ किया है और अब वही छात्रों एवं युवाओं के भविष्य से भी खिलवाड़ कर रही है।

बुधवार को संसद परिसर में अयोध्या श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी की घटना के विरोध में समाजवादी पार्टी के सांसदों के साथ प्रदर्शन करने के बाद मीडिया से बातचीत में श्री यादव ने कहा कि जब तक भाजपा सरकार सत्ता में रहेगी, तब तक देश के सामने खड़े संकट समाप्त नहीं होंगे।

उन्होंने छात्र आंदोलनों के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। अखिलेश यादव ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया, आंसू गैस के गोले छोड़े गए और लाठीचार्ज किया गया, जिससे कई छात्र और युवा घायल हुए तथा उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं के लिए सरकार को जवाब देना चाहिए और स्पष्ट करना चाहिए कि छात्रों और युवाओं पर बल प्रयोग किसके आदेश पर किया गया, क्योंकि पुलिस और सशस्त्र बल गृह विभाग के अधीन आते हैं।

सपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार की नीतियों के कारण छात्र, नौजवान, किसान और मजदूर सभी परेशान हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा है, जबकि किसानों को समय पर खाद और बीज उपलब्ध नहीं हो रहे हैं। उत्तर प्रदेश में धान की खेती के लिए किसानों को डीएपी और यूरिया के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है तथा सहकारी समितियों पर लंबी कतारें लग रही हैं।

अखिलेश यादव ने कहा कि प्रदेश में खाद की कालाबाजारी और मुनाफाखोरी की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं, जिससे किसान गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार में डीएपी और यूरिया की उपलब्धता केवल सरकारी कागजों तक सीमित है, जबकि जमीनी स्तर पर किसानों को हर सीजन में खाद के लिए भटकना पड़ता है। उनका कहना था कि सरकार हर बार आंकड़ों का हवाला देती है, लेकिन वास्तविक स्थिति उससे बिल्कुल अलग है।

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