
इटावा, 31 अगस्त। इटावा लॉयन सफारी में करीब डेढ़ महीने से अधिक समय से उपचाराधीन शेरनी राधिका की सोमवार तड़के करीब 4:30 बजे मौत हो गई। राधिका की तबीयत 8 जुलाई को उस समय बिगड़ी थी, जब सफारी के नाइट सेल में दूसरी शेरनी नीरजा ने उसकी पूंछ काटकर उसे घायल कर दिया था। घटना के बाद सफारी प्रशासन ने उसका उपचार शुरू कराया और मथुरा स्थित पंडित दीन दयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय से विशेषज्ञ चिकित्सकों को बुलाया गया।
सफारी प्रशासन के मुताबिक, विशेषज्ञों की सलाह और प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव, उत्तर प्रदेश से मिले निर्देशों के बाद संक्रमण फैलने की आशंका को देखते हुए राधिका की पूंछ को ऑपरेशन के जरिए छोटा किया गया था। उपचार के दौरान राधिका ने कई बार खुद अपनी पूंछ काटने का प्रयास किया और तीन बार पूंछ पर बैठने के कारण उसके टांके भी टूट गए। इसके बाद भी सफारी के वन्यजीव चिकित्सकों की निगरानी में उसका उपचार लगातार जारी रहा।
52 दिन तक चला उपचार, नहीं बच सकी राधिका
सफारी प्रशासन के अनुसार, 52 दिनों तक उपचार और लगातार निगरानी के बावजूद राधिका की हालत में सुधार नहीं हो सका। वह अत्यधिक कमजोर हो गई थी। सोमवार सुबह उसकी मौत के बाद प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव, उत्तर प्रदेश को सूचना दी गई। उनके निर्देश पर पशु चिकित्सकों के पैनल ने शेरनी का पोस्टमार्टम किया।

पोस्टमार्टम में प्रथम दृष्टया राधिका की मौत अत्यधिक कमजोर होने के कारण मल्टी ऑर्गन फेलियर से होने की संभावना जताई गई है। इसके अलावा उसके पेट और आंतों में अत्यधिक मात्रा में हवा/गैस भी पाई गई। मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट करने के लिए विसरा सुरक्षित कर जांच के लिए आईवीआरआई, बरेली भेजा जा रहा है।
2019 में गुजरात से लाई गई थी राधिका
सफारी प्रशासन के मुताबिक, शेरनी राधिका को वर्ष 2019 में गुजरात के जूनागढ़ से इटावा सफारी लाया गया था। उसकी उम्र करीब नौ वर्ष थी। शारीरिक अक्षमता और असामान्य व्यवहार के कारण उसे कभी पर्यटकों के सामने सफारी में नहीं खोला गया और न ही ब्रीडिंग कार्यक्रम में शामिल किया गया।
लापरवाही के आरोप भी उठे
राधिका की मौत के बाद सफारी प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल भी उठने लगे हैं। आरोप है कि नाइट सेल में वन्यजीवों की सुरक्षा और निगरानी में लापरवाही बरती गई, जिसके चलते नीरजा ने राधिका पर हमला कर उसकी पूंछ को गंभीर रूप से घायल कर दिया। आरोप लगाने वालों का कहना है कि चोट के बाद लगातार बिगड़ती हालत और उपचार के बावजूद राधिका को नहीं बचाया जा सका, इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
हालांकि, सफारी प्रशासन का कहना है कि राधिका की घटना के बाद लगातार निगरानी की गई और विशेषज्ञ चिकित्सकों की सलाह के अनुसार उसका उपचार किया जाता रहा। अब विसरा की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही उसकी मौत के वास्तविक कारणों की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
राधिका की मौत ने एक बार फिर इटावा सफारी में वन्यजीवों की सुरक्षा, चिकित्सा व्यवस्था और प्रबंधन की निगरानी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब जांच रिपोर्ट पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
आशुतोष बाजपेई ब्यूरो रिपोर्ट इटावा



