वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के खेल मैदानों के इस्तेमाल और उनसे प्राप्त बुकिंग राशि को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत मांगी गई जानकारी के जवाब में विश्वविद्यालय क्रीड़ा परिषद ने दो वित्तीय वर्षों में खेल मैदानों की बुकिंग से कुल 8.61 लाख रुपये प्राप्त होने की जानकारी दी है। हालांकि, इस राशि का मैदानवार, बुकिंगवार और संस्था अथवा एजेंसीवार पूरा विवरण उपलब्ध नहीं कराए जाने का आरोप है। मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता संतोष कुमार त्रिपाठी ने संबंधित अधिकारियों को अलग-अलग विधिक नोटिस भेजकर शेष सूचनाएं और अभिलेख उपलब्ध कराने की मांग की है।
अधिवक्ता ने 16 जुलाई 2026 को आरटीआई आवेदन संख्या BANHU/R/E/26/00745 के जरिए बीएचयू के विभिन्न खेल मैदानों के इस्तेमाल, निजी प्रशिक्षकों एवं खेल अकादमियों को मैदान दिए जाने, अनुमति, शुल्क, बुकिंग तथा विश्वविद्यालय को प्राप्त राशि से संबंधित जानकारी और दस्तावेज मांगे थे। जानकारी पूरी नहीं मिलने पर 9 अगस्त को प्रथम अपील संख्या BANHU/A/E/26/00203 दाखिल की गई।
दो वर्षों में मिले 8.61 लाख रुपये
क्रीड़ा परिषद के जवाब के अनुसार वित्तीय वर्ष 2024-25 में मैदानों की बुकिंग से 5,19,500 रुपये और वर्ष 2025-26 में 3,41,500 रुपये प्राप्त हुए। इस तरह दो वर्षों में कुल 8,61,000 रुपये की राशि बुकिंग शुल्क के रूप में प्राप्त हुई।
अधिवक्ता का कहना है कि आरटीआई में केवल कुल राशि नहीं, बल्कि उससे संबंधित विस्तृत अभिलेख मांगे गए थे। इसलिए नोटिस में यह जानकारी मांगी गई है कि किस मैदान की बुकिंग कब हुई, किस व्यक्ति या संस्था ने भुगतान किया और किस उद्देश्य के लिए मैदान उपलब्ध कराया गया।
बाहरी एजेंसियों को मैदान देने की व्यवस्था पर सवाल
क्रीड़ा परिषद के जवाब में एक ओर गैर-बीएचयू प्रतिभागियों को मैदानों में अनुमति नहीं होने की बात कही गई है, वहीं दूसरी ओर बाहरी एजेंसियों को मांग के आधार पर किराये पर क्रीड़ा सुविधाएं उपलब्ध कराने की जानकारी दी गई है। नोटिस में इसी व्यवस्था को स्पष्ट करने की मांग की गई है। साथ ही बाहरी एजेंसियों को मैदान देने से संबंधित आदेश, अनुमति और बुकिंग अभिलेख भी मांगे गए हैं।
शुल्क दर तय है तो वसूली का रिकॉर्ड भी हो
क्रीड़ा परिषद की 7 अगस्त 2025 की शुल्क-दर सूची में बीएचयू से बाहर की संस्थाओं के लिए प्रतियोगिता, मैच और व्यावसायिक खेल प्रयोजन की दरें निर्धारित हैं। नोटिस में शुल्क सूची की स्वीकृति, उसके लागू होने तथा उसके आधार पर की गई बुकिंग और वसूली से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा गया है।
ब्रोचा मैदान में अकादमियों को मैदान देने की प्रक्रिया पर जानकारी मांगी
ब्रोचा मैदान से संबंधित 16 अक्टूबर 2025 के दस्तावेज में खेल अकादमियों को मैदान उपलब्ध कराने के लिए आवेदन, अकादमी का पंजीकरण एवं अनुभव, परीक्षण और सफल आवेदक के साथ समझौते की प्रक्रिया का उल्लेख है। नोटिस में पूछा गया है कि क्या वास्तव में मैदान आवंटन में यही प्रक्रिया अपनाई गई और यदि हां तो उससे संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएं।
रुहिया ग्राउंड की जानकारी पर भी उठे सवाल
आरटीआई में रुहिया ग्राउंड के इस्तेमाल, निजी प्रशिक्षकों और खेल अकादमियों की गतिविधियों, अनुमति, मैदान आवंटन और शुल्क से संबंधित जानकारी भी मांगी गई थी। 25 अगस्त को मिले जवाब में केवल यह बताया गया कि रुहिया ग्राउंड चिकित्सा विज्ञान संस्थान के अधीन है। मैदान के वास्तविक इस्तेमाल और उससे संबंधित अन्य मांगी गई सूचनाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं। इसके बाद चिकित्सा विज्ञान संस्थान के निदेशक को अलग से विधिक नोटिस भेजा गया है।
15 दिन में मांगा जवाब, नहीं तो केंद्रीय सूचना आयोग जाने की बात
अलग-अलग भेजे गए विधिक नोटिस में संबंधित अधिकारियों से नोटिस प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर शेष सूचनाएं और उपलब्ध दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराने को कहा गया है। सूचना पूरी नहीं मिलने की स्थिति में केंद्रीय सूचना आयोग में द्वितीय अपील समेत अन्य कानूनी उपाय अपनाने की बात कही गई है।
अधिवक्ता संतोष कुमार त्रिपाठी ने कहा कि आरटीआई में मांगी गई सूचनाओं और प्राप्त जवाबों का मिलान करने के बाद ही नोटिस भेजे गए हैं। उनका कहना है कि उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष पर आरोप लगाना नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय के खेल मैदानों के इस्तेमाल, बुकिंग, शुल्क और प्राप्त राशि से संबंधित अभिलेखों में पारदर्शिता सुनिश्चित कराना है। उन्होंने कहा कि निर्धारित समय में शेष सूचना नहीं मिलने पर मामले को केंद्रीय सूचना आयोग के समक्ष आगे ले जाया जाएगा।



