
कसया, कुशीनगर। बुद्ध स्थली कुशीनगर में भाद्र पूर्णिमा/ मधु पूर्णिमा के पावन अवसर पर बौद्ध भिक्षुओं ने बुद्ध का पूजन, वंदन करते हुए विश्व कल्याण की कामना की और नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा एवं शोक संतप्त परिवारों के शांति के लिए सूत्रपाठ किया।
शनिवार को भिक्षु संघ के अध्यक्ष ऊ नंदा के निर्देशन में भंते गण ने सुबह मुख्य महा परिनिर्वाण मंदिर में धम्म वंदना कर चीवर चढ़ाया और फर्श पर बैठकर आराधना की
तथा बुद्ध के पंचशील के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। आज के दिन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए भंते डॉ नन्द ने कहा कि मधु पूर्णिमा के दिन तथागत ने अपने प्रिय शिष्य आनंद के अनुरोध पर
तथागत ने 2609 वर्ष पूर्व महा प्रजापति गौतमी को प्रथम भिक्षुणी बनाया। साथ ही पांच सौ क्षत्रिय महिलाओं को उपसम्पदा दी गई तथा बुद्ध काल में भिक्षुणी संघ का शुभारंभ हुआ। यह बुद्ध ने महिलाओं को बराबरी और सम्मान देने के लिए किया।
इसके पश्चात श्रीलंका बुद्ध बिहार अशोक स्तम्भ स्थित मुख्य मंदिर में भिक्षुओं ने विशेष पूजा और सूत्र पाठ किया तथा नेपाल में मारे गए लोगों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। भिक्षुओं ने
परिजनों को असहनीय पीड़ा सहने की भगवान से कामना की। इसके पश्चात भिक्षु संघ को भोजन दान उपासकों ने दिया। संघ अध्यक्ष नंदा ने कहा कि बुद्ध की शिक्षाओं में ही सभी जीवो का कल्याण है।
इस दौरान संघ उपाध्यक्ष भिक्षु शिलप्रकाश उर्फ चश्मा बाबा, मंत्री डॉ नन्द रतन, उप मंत्री नंदका, भंते सों क्रान, डॉ कितिफान, भंते विनय कीर्ति, भंते यशपाल, भंते राजेंद्रा, भंते उपाली, भंते समिट सहित
भिक्षु, उपासक गण मौजूद रहे।



