SIR पर फिर गरमाई सियासत, आराधना मिश्रा ने बीजेपी को घेरा

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने बीजेपी की ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ यात्रा पर निशाना साधते हुए इसे लोकतंत्र के खिलाफ अभियान बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि SIR के नाम पर प्रदेश में करोड़ों मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं।

प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में आराधना मिश्रा ने कहा कि बीजेपी जिस यात्रा को लोकतंत्र बचाने का अभियान बता रही है, वह वास्तव में लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब SIR के जरिए बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम काटे गए हैं, तो बीजेपी किस लोकतंत्र को बचाने की बात कर रही है?

बीजेपी के बड़े नेताओं की यात्राओं पर उठाए सवाल

आराधना मिश्रा ने कहा कि बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन गोरखपुर, पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा बरेली और कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान लखनऊ में इस अभियान में शामिल हुए। वहीं, गृह मंत्री अमित शाह भी हैदराबाद और करनाल में इसी अभियान का हिस्सा बने।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि अमित शाह की उत्तर प्रदेश यात्रा और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के समर्थन में चलाया जा रहा अभियान प्रदेश की राजनीति में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ बदलाव की कोशिश का हिस्सा है। उन्होंने SIR के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह की भूमिका होने का भी आरोप लगाया।

SIR के बाद 3.31 करोड़ मतदाता कम होने का दावा

प्रेसवार्ता में आराधना मिश्रा ने मतदाता सूची के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के अनुसार उत्तर प्रदेश की अनुमानित आबादी 25.70 करोड़ है। इस आधार पर प्रदेश में करीब 16.70 करोड़ मतदाता होने चाहिए। उन्होंने राज्य निर्वाचन आयोग की स्थानीय निकायों की मतदाता सूचियों के आंकड़े भी पेश किए।

कांग्रेस की ओर से दिए गए आंकड़ों के मुताबिक ग्राम पंचायतों, नगर निगमों, नगर पालिका परिषदों और नगर पंचायतों को मिलाकर कुल 16,77,08,379 मतदाता दर्ज हैं। इनमें 8,89,52,684 पुरुष और 7,87,55,695 महिला मतदाता शामिल हैं।

इसके मुकाबले SIR के बाद उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची में 13,39,84,792 मतदाता रह जाने का दावा किया गया। कांग्रेस ने दोनों आंकड़ों के बीच 3,30,65,208 यानी करीब 3.31 करोड़ मतदाताओं का अंतर बताया है।

मुख्यमंत्री के सामने रखे गए आंकड़ों का भी किया जिक्र

आराधना मिश्रा ने कार्यसमिति की बैठक से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने भी प्रदेश में मतदाताओं की संख्या और सूची से नाम गायब होने को लेकर चिंता जताई थी। उनके मुताबिक, बैठक में 1.27 करोड़ मतदाताओं के नाम गायब होने, पंचायत सूची में दर्ज 66 लाख लोगों के विधानसभा मतदाता सूची में नहीं होने और सरकारी योजनाओं के करीब 55 लाख लाभार्थियों के नाम सूची में शामिल नहीं होने जैसे मुद्दे उठाए गए थे।

उन्होंने यह भी कहा कि 18 और 19 साल के करीब साढ़े चार लाख युवाओं के नाम मतदाता सूची में नहीं जुड़े हैं। दूसरे राज्यों से उत्तर प्रदेश में विवाह के बाद आई महिलाओं के नाम छूटने और कुछ विधानसभा क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या को लेकर भी सवाल उठाए गए।

बाबा साहेब आंबेडकर के बयान का किया उल्लेख

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने संविधान सभा में 16 जून 1949 को डॉ. भीमराव आंबेडकर की ओर से चुनाव आयुक्त के कार्यकाल और उसकी स्वतंत्रता को लेकर कही गई बातों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता लोकतंत्र के लिए बेहद जरूरी है।

आराधना मिश्रा ने आरोप लगाया कि SIR के जरिए मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने पश्चिम बंगाल और बिहार के मुख्यमंत्रियों के बयानों का भी जिक्र किया, जिनमें मतदाता सूची से नाम हटने के बाद सरकारी राशन और अन्य योजनाओं के लाभ पर असर पड़ने की बात कही गई थी।

‘वोट चोरी के खिलाफ जारी रहेगी लड़ाई’

आराधना मिश्रा ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के नेतृत्व में पार्टी वोट चोरी के खिलाफ लड़ाई लड़ रही है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस SIR के माध्यम से मतदाताओं के अधिकारों को प्रभावित नहीं होने देगी।

उन्होंने यह भी कहा कि अमित शाह की उत्तर प्रदेश यात्रा इंडिया गठबंधन की जीत की गारंटी साबित होगी। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के मुताबिक, पार्टी लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए अपना संघर्ष जारी रखेगी।

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