समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी पर समाज में विभाजन की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा ने समय-समय पर देश के सौहार्द, राजनीतिक दलों, राज्यों की बिरादरियों, स्थानीय समाज, रिश्तेदारों, मित्रों और संयुक्त परिवारों तक को बांटने का प्रयास किया। उन्होंने दावा किया कि अब बच्चों और उनके अभिभावकों के बीच भी विभाजन की कोशिश की गई, लेकिन इसमें सफलता नहीं मिली क्योंकि दिलों के रिश्ते किसी के प्रयास से नहीं टूट सकते।
अखिलेश यादव ने कहा कि अब स्थिति ऐसी है कि कट्टर भाजपा समर्थक भी अयोध्या में भगवान के मंदिर से जुड़े कथित “चढ़ावा-चंदा-दान चोरी” प्रकरण और दिल्ली में बच्चियों, बच्चों, अभिभावकों, डॉक्टरों, पत्रकारों तथा आंदोलन के समर्थन में पहुंचे लोगों पर हुई कथित हिंसा को लेकर शर्मिंदगी महसूस कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन घटनाओं के बाद कुछ लोगों ने भाजपा के विरोध में, जबकि कुछ ने जनता के आक्रोश के डर से अपने घरों, दुकानों और वाहनों से भाजपा के झंडे तक हटा दिए हैं।
सपा प्रमुख ने अपने बयान में कहा कि लोगों की आंखें समय रहते खुल गई हैं क्योंकि उन्हें अपने बच्चों के भविष्य और देश की एकता की चिंता है। उन्होंने इसे सकारात्मक बदलाव बताते हुए दावा किया कि जनता अब परिवर्तन का मन बना चुकी है।
अपने वक्तव्य के अंत में अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सत्ता से जाएगी और दोबारा वापस नहीं आएगी।



