मनरेगा में समतलीकरण के नाम पर 6-7 लाख रुपये फर्जी निकालने का आरोप

प्रशासक प्रधान ने रोजगार सेवक, सचिव व टीए पर मिलीभगत का लगाया आरोप, जांच कर कार्रवाई की मांग

इटावा। बसरेहर विकासखंड की ग्राम पंचायत सरसई हेलू की प्रशासक प्रधान मीना देवी ने मनरेगा कार्यों में अनियमितता और बिना कार्य कराए भुगतान किए जाने का आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी को शिकायती पत्र सौंपा है। उन्होंने रोजगार सेवक, सचिव और तकनीकी सहायक पर मिलीभगत कर सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए उच्चस्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

प्रशासक प्रधान का आरोप है कि ग्राम पंचायत में मनरेगा के तहत समतलीकरण कार्य के नाम पर करीब 6 से 7 लाख रुपये निकाल लिए गए, जबकि मौके पर काम नहीं कराया गया। शिकायत में एमबी और भुगतान हो जाने का भी दावा किया गया है। प्रधान ने रोजगार सेवक संजय कुमार, सचिव समउद्दीन खान और टीए एस कुमार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए साक्ष्य संलग्न किए जाने की बात कही है।

मीना देवी ने आरोप लगाया कि रोजगार सेवक द्वारा उनकी मोहर बनवाकर उनके हस्ताक्षर भी स्वयं किए जा रहे हैं और इसी के आधार पर मनरेगा की फाइलें तैयार की जाती हैं। उनका कहना है कि इससे उनके अधिकारों का दुरुपयोग हो रहा है। उन्होंने संबंधित कर्मचारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की मांग की है।

शिकायत में ग्राम पंचायत सचिव पर पंचायत में नियमित रूप से नहीं आने और सरकारी योजनाओं व बैठकों की जानकारी प्रशासक प्रधान को नहीं देने का भी आरोप लगाया गया है। प्रधान का कहना है कि वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना भी उनकी जानकारी के बिना फर्जी प्रस्ताव तैयार कर पोर्टल पर फीड करा दी गई। आरोप है कि बैठकों में उनकी जगह दूसरी महिला को बैठाकर फोटो खींचे जाते हैं।

अन्नपूर्णा भवन के निर्माण में भी अनियमितता का आरोप

प्रधान ने राशन की दुकान के लिए बनाए जा रहे अन्नपूर्णा भवन के निर्माण में भी मानकों की अनदेखी का आरोप लगाया है। शिकायत के मुताबिक निर्माण कार्य एक वर्ष से अधिक समय से चल रहा है, लेकिन भवन की नींव और अन्य निर्माण कार्य मानक के अनुरूप नहीं किए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि खंडिंजा में चार सरियों का झाल डालने के बजाय एक ही सरिया डाली गई है। बरसात के दौरान नए भराव के बावजूद अभी तक लेंटर नहीं डाले जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं।

जांच टीम पर भी खानापूर्ति का आरोप

शिकायतकर्ता के अनुसार उन्होंने पूर्व में मुख्य विकास अधिकारी, जिला पंचायत राज अधिकारी, जिला विकास अधिकारी, डीसी और खंड विकास अधिकारी समेत अन्य अधिकारियों से कई बार शिकायत की थी। उनका आरोप है कि जांच के लिए टीम पंचायत में पहुंची, लेकिन कार्यस्थलों का निरीक्षण करने के बजाय पंचायत घर में बैठकर ही जांच पूरी कर ली गई।

प्रधान ने 18 जुलाई 2026 को एडीओ आरडी दिनेश कुमार व उनकी टीम द्वारा की गई जांच को लेकर भी इसी तरह का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि टीम ने मौके पर जाकर कार्यों का निरीक्षण नहीं किया।

इसके अलावा प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री आवास योजना की जांच में सचिव को ही प्रभारी बनाए जाने, ग्राम सभा की बैठक की जानकारी नहीं देने और फर्जी प्रस्ताव तैयार किए जाने का भी आरोप लगाया गया है। हाल में मनरेगा के तहत इंटरलॉकिंग और वृक्षारोपण के लिए टी-गार्ड लगाने का कार्य भी उनकी जानकारी के बिना शुरू कराने की बात शिकायत में कही गई है।

प्रशासक प्रधान मीना देवी ने जिलाधिकारी से पूरे मामले की उच्चस्तरीय टीम गठित कर जांच कराने, संबंधित अभिलेखों और एमबी रजिस्टर की जांच कराने तथा आरोप सही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

 

ब्यूरो रिपोर्ट : आशुतोष बाजपेई इटावा

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