
बरेली। रुहेलखंड की राजनीति में मंगलवार को बड़ा बदलाव देखने को मिला। आंवला लोकसभा सीट से दो बार सांसद रहे धर्मेंद्र कुमार कश्यप ने भारतीय जनता पार्टी छोड़कर समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया। लखनऊ स्थित सपा मुख्यालय में राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई। इस दौरान धर्मेंद्र कश्यप की बेटी कीर्ति कश्यप और सैकड़ों समर्थक भी मौजूद रहे। विधानसभा चुनाव से पहले उनके इस कदम को बरेली समेत रुहेलखंड में बदलते राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
धर्मेंद्र कश्यप पिछले कुछ समय से भाजपा संगठन में उपेक्षा को लेकर नाराज बताए जा रहे थे। सात अक्टूबर को उन्होंने सोशल मीडिया पर समुद्र किनारे सूर्यास्त की तस्वीर के साथ ‘टाटा बाय-बाय’ लिखकर पोस्ट साझा की थी। इसके बाद उनके भाजपा छोड़ने की अटकलें तेज हो गई थीं। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में उनका विरोध करने वाले नेताओं को संगठन में अहम जिम्मेदारियां मिलने और राज्यसभा चुनाव में टिकट नहीं मिलने को भी उनकी नाराजगी की वजह माना जा रहा था।
इससे पहले 11 अक्टूबर को धर्मेंद्र कश्यप ने लखनऊ में अखिलेश यादव से मुलाकात की थी। इस दौरान सपा जिलाध्यक्ष शुभलेश यादव, वरिष्ठ नेता वीरपाल सिंह यादव और पूर्व मंत्री भगवत सरन गंगवार भी मौजूद रहे थे। मंगलवार को सदस्यता ग्रहण करने के साथ ही उनके सपा में शामिल होने की चर्चाओं पर विराम लग गया।
बेटी की उम्मीदवारी पर भी चर्चा
धर्मेंद्र कश्यप के साथ उनकी बेटी कीर्ति कश्यप की राजनीतिक भूमिका भी चर्चा में है। राजनीतिक गलियारों में अटकलें हैं कि धर्मेंद्र अपनी बेटी को आगामी विधानसभा चुनाव में बिथरी चैनपुर सीट से उम्मीदवार बनाना चाहते हैं। हालांकि, सपा ने अभी इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। उनकी एंट्री से इस सीट पर टिकट के दावेदारों के बीच हलचल बढ़ने की संभावना है।
धर्मेंद्र कश्यप का राजनीतिक सफर बसपा और सपा से शुरू हुआ था। वर्ष 2002 में बसपा और 2007 में सपा के टिकट पर विधायक चुने गए। मई 2013 में भाजपा में शामिल होने के बाद पार्टी ने उन्हें 2014 और 2019 में आंवला से लोकसभा चुनाव लड़ाया, जिसमें उन्होंने जीत दर्ज की। वर्ष 2024 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। अब करीब 13 साल बाद उनकी सपा में वापसी हुई है।
सपा में शामिल होने के बाद धर्मेंद्र कश्यप ने भाजपा सरकार की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि बुलडोजर कार्रवाई में गरीबों को निशाना बनाया जा रहा है। अखिलेश यादव ने उनके आने से पार्टी को मजबूती मिलने का भरोसा जताया। कश्यप समाज में धर्मेंद्र की राजनीतिक पकड़ को देखते हुए उनके इस फैसले का असर आगामी विधानसभा चुनाव में देखने को मिल सकता है।



