महिला कामगारों के लिए कार्यस्थल होंगे और अधिक सुरक्षित, बच्चों की देखभाल की भी होगी व्यवस्था: केशव प्रसाद मौर्य

लखनऊ उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं ग्राम्य विकास मंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत महिला श्रमिकों के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक कार्यस्थल विकसित करने पर विशेष जोर दिया है। उन्होंने ग्राम्य विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए कि विकसित भारत–जी राम जी एक्ट 2025 के तहत महिलाओं के लिए कार्यस्थलों पर सभी आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं, ताकि वे बिना किसी चिंता के अपने कार्य में योगदान दे सकें।

उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी को और मजबूत बनाना है। इसके लिए महिला श्रमिकों को ऐसा माहौल उपलब्ध कराया जाएगा, जहां वे अपने छोटे बच्चों की देखभाल की चिंता किए बिना काम कर सकें।

उपमुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि जिन कार्यस्थलों पर पांच वर्ष से कम आयु के पांच या उससे अधिक बच्चे मौजूद हों, वहां उनकी देखभाल और सुरक्षा के लिए एक महिला की नियुक्ति अनिवार्य रूप से की जाए। नियुक्त महिला को निर्धारित मजदूरी दर के अनुसार समय पर भुगतान भी सुनिश्चित किया जाएगा। इस व्यवस्था से जहां कामकाजी महिलाओं को राहत मिलेगी, वहीं एक अन्य महिला को रोजगार का अवसर भी प्राप्त होगा।

केशव प्रसाद मौर्य ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि सभी कार्यस्थलों पर श्रमिकों के लिए स्वच्छ पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था हर हाल में उपलब्ध रहे। उन्होंने कहा कि मौजूदा गर्मी और आने वाले बारिश के मौसम को देखते हुए श्रमिकों की सुरक्षा के लिए छायादार शेड, बारिश से बचाव और अन्य आवश्यक सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएं, ताकि किसी भी श्रमिक को मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना न करना पड़े।

उन्होंने कहा कि सरकार श्रमिकों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है और हर मजदूर को सुरक्षित एवं सम्मानजनक कार्य वातावरण उपलब्ध कराना उसकी जिम्मेदारी है। इसी उद्देश्य के तहत अधिकारियों को नियमित रूप से कार्यस्थलों का निरीक्षण करने, व्यवस्थाओं की निगरानी करने और नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार श्रमिकों के कल्याण और ग्रामीण विकास को समान प्राथमिकता देते हुए लगातार ऐसे कदम उठा रही है, जिससे हर वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ते हुए पारदर्शी और बेहतर कार्य व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके।

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