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लोकसभा में अखिलेश यादव

संसद में बोले अखिलेश: देश की सीमाओं से लेकर गरीबी तक सरकार पर साधा निशाना

नई दिल्ली। संसद के शीतकालीन सत्र में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने देश की सीमाओं से लेकर आर्थिक विषमता और जाति जनगणना तक कई मुद्दों पर सरकार को घेरा। अखिलेश ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक असमानता और लोकतंत्र के मूलभूत अधिकारों पर विफल साबित हुई है।

अखिलेश यादव ने लद्दाख की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि “हमारी सीमाएं सुरक्षित नहीं हैं। हमारे पड़ोस में गांव बस गए हैं और लद्दाख में हम अपनी सीमा से पीछे हटे हैं। यह सरकार की कमजोरी को दर्शाता है।” उन्होंने पूछा कि क्या सरकार इन मुद्दों पर ईमानदारी से जवाब देगी।

अखिलेश ने दावा किया कि देश में 60% लोग गरीब हैं और 2014 के बाद से आर्थिक विषमता तेजी से बढ़ी है। उन्होंने कहा, “82 करोड़ लोग सरकारी अनाज पर निर्भर हैं। क्या यह सरकार की आर्थिक नीतियों की विफलता को नहीं दर्शाता?”

अखिलेश ने उत्तर प्रदेश के स्थानीय निकाय चुनावों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि “कई लोगों को वोट डालने से रोका गया। पुलिस ने लोगों को धमकाया और रिवॉल्वर दिखाकर उन्हें डराया। क्या यही गणतंत्र है?”

सपा प्रमुख ने वादा किया कि अगर उनकी पार्टी को सत्ता में आने का मौका मिला, तो वे जाति आधारित जनगणना कराएंगे। उन्होंने कहा, “जाति जनगणना से ही समाज के हर वर्ग को न्याय और हिस्सेदारी मिलेगी। यह सरकार सिर्फ कुछ लोगों को लाभ पहुंचा रही है।”

  1. सीमाओं की सुरक्षा: पड़ोसी देशों द्वारा हमारी सीमाओं पर गांव बसाना गंभीर चिंता का विषय।
  2. लद्दाख विवाद: हमारी सेना को पीछे हटाने का निर्णय राष्ट्रीय सुरक्षा पर सवाल उठाता है।
  3. गरीबी और असमानता: देश में 60% लोग गरीब, 82 करोड़ लोग सरकारी राशन पर निर्भर।
  4. लोकतंत्र का हनन: यूपी में पुलिस द्वारा लोगों को वोट डालने से रोकने का आरोप।
  5. जाति जनगणना का वादा: सत्ता में आने पर जातिगत गणना कराकर सामाजिक न्याय सुनिश्चित करेंगे।

अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार से पूछा, “क्या यही लोकतंत्र है, जहां गरीब और वंचित तबकों को उनकी मूलभूत जरूरतों और अधिकारों से वंचित किया जा रहा है? सरकार को देश की सीमाओं और जनता दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।”

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